श्रीनगर, 8 जनवरी (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद के निधन के बाद संवैधानिक संकट से बचने के लिए नए मुख्यमंत्री का शपथग्रहण तुरंत होना चाहिए। सईद का गुरुवार को निधन हो गया था।
संविधान विशेषज्ञ, वरिष्ठ वकील शेख शकील ने शुक्रवार को कहा, “यदि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और सईद की बेटी महबूबा मुफ्ती इस्लामी परंपराओं के अनुसार मातम का चौथा दिन (रविवार) बीतने से पहले शपथ ग्रहण न करने पर अड़ती हैं, तो ऐसे में राज्यपाल एन.एन. वोहरा के पास कुछ समय तक राज्यपाल शासन लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”
शकील ने कहा, “राज्यपाल को तबतक के लिए विधानसभा को निलंबित अवस्था में रखने के लिए संविधान द्वारा प्रदत्त उन्हें अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करना होगा, जबतक कि वह जम्मू एवं कश्मीर में लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित एक सरकार की संभावना न तलाश लें।”
जम्मू एवं कश्मीर के संविधान के अनुसार, किसी संवैधानिक संकट की स्थिति में राज्यपाल छह महीने के लिए राज्य की बागडोर अपने हाथ में ले सकते हैं, जबकि इसके उलट अन्य राज्यों में ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन लागू होता है।
शकील ने कहा कि विधानसभा में 87 सदस्यों वाली सबसे बड़ी पार्टी को सदन में बहुमत का दावा करने के लिए हरहाल में तुरंत राज्यपाल से संपर्क करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “दावे से संतुष्ट होने के बाद राज्यपाल शपथ ग्रहण के लिए उस व्यक्ति को आमंत्रित करेंगे।”
शकील ने कहा, “मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाला व्यक्ति बाद में अपने मंत्रियों की एक सूची राज्यपाल को सौंपेगा। उसके बाद राज्यपाल सभी को मंदी पद की शपथ दिलाएंगे।”
मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद का दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में गुरुवार को सुबह 9.10 बजे निधन हो गया था।
पीडीपी और गठबंधन सरकार में सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सूत्रों ने कहा है कि महबूबा मुफ्ती शुक्रवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकती हैं।
पीडीपी सूत्रों ने कहा कि महबूबा मुफ्ती नहीं चाहेंगी कि उनके पिता के निधन के कारण राज्य में किसी तरह का संवैधानिक संकट पैदा हो।
मुफ्ती परिवार के करीबी माने जाने वाले और मुफ्ती मंत्रिमंडल में एक वरिष्ठ मंत्री ने आईएएनएस से कहा, “महबूबाजी अभी सदमे में हैं। परिवार के किसी सदस्य को उन्हें शुक्रवार को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए राजी करना चाहिए।”
नेशनल क्रांफ्रेंस के संस्थापक और राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख मुहम्मद अब्दुल्ला का 1982 में जब निधन हुआ था, तो पिता के निधन के कुछ ही घंटे के भीतर उनके पुत्र फारूख अब्दुल्ला को तत्कालीन राज्यपाल बी.के. नेहरू ने शपथ दिलाई थी।
इसी तरह 1971 में जब जी.एम. सादिक का निधन हुआ था, तब किसी संवैधानिक संकट को टालने के लिए सईद मीर कासिम को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई थी।
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