रांची, 13 जनवरी (आईएएनएस)। झारखंड में जादू-टोने जैसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई के लिए त्वरित अदालतें बनाई जाएंगी। ये राज्य के पांच जिलों में स्थापित की जाएंगी।
एक अधिकारी ने बुधवार को आईएएनएस से कहा, “त्वरित अदालतें रांची, पश्चिम सिंहभूम, खूंटी, पलामू और सिमडेगा जिलों में स्थापित की जाएंगी। यहां जादू-टोने की घटनाओं के अधिकतम मामले दर्ज होते हैं।”
राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को इन अदालतों के लिए मंजूरी दे दी है।
झारखंड में हर साल लगभग 40-50 महिलाओं को चुड़ैल घोषित कर मार दिया जाता है। राज्य के गठन के बाद से अबतक इस अंधविश्वास ने 700 से अधिक महिलाओं की जाने जा चुकी हैं।
झारखंड सरकार ने इन घटनाओं को रोकने के लिए साल 2001 में एंटी-विचक्राफ्ट कानून बनाया था। इसके अलावा इन मामलों पर नजर रखने के लिए एक विशेष जांच दल भी गठित किया गया था, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कानून को बेहद कमजोर करार दिया है।
सामाजिक कार्यकर्ता और झारखंड महिला आयोग की पूर्व सदस्य वासवी ने आईएएनएस से कहा, “त्वरित अदालतें स्थापित करना अच्छी पहल है, लेकिन कानून को अधिक सख्त करने की जरूरत है। साल 2001 का कानून बेहद कमजोर है।”
वासवी ने बताया, “इस कानून में ओझाओं को दंड देने का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि ये ओझा लोगों को औरतों की हत्या करने के लिए उकसाते हैं। प्रत्येक जिले में जादू-टोना निषेध केंद्र होना चाहिए। ऐसे मामले पुलिस थाने में अलग से दर्ज होने चाहिए और अधिक त्वरित अदालतें स्थापित होनी चाहिए, ताकि इन मामलों पर शीघ्र कार्रवाई हो सके।”
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