नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। नए साल में सबसे ज्यादा लोगों ने यह संकल्प लिया है कि वे अपने साथी के साथ ज्यादा वक्त बिताएंगे। एक सर्वेक्षण से यह जानकारी मिली है।
नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। नए साल में सबसे ज्यादा लोगों ने यह संकल्प लिया है कि वे अपने साथी के साथ ज्यादा वक्त बिताएंगे। एक सर्वेक्षण से यह जानकारी मिली है।
वेबसाइट शादी डॉट कॉम द्वारा किए गए सर्वेक्षण में कुंवारे भारतीयों के विचार को समझने की कोशिश की गई। इस ऑनलाइन सर्वेक्षण में 16,500 लोगों ने हिस्सा लिया जिनमें 25 से 34 साल के कुंवारे युवा शामिल थे।
जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वे नए साल पर संकल्प लेने में यकीन करते हैं, तो 42.5 फीसदी लोगों ने कहा, “हां, मैंने अपने साथी के साथ ज्यादा वक्त बिताने का संकल्प लिया है।” वहीं, 33,9 फीसदी लोगों का कहना था कि नहीं संकल्प लेने का कोई फायदा नहीं क्योंकि बाद में हम इसे भूल जाते हैं। जबकि 23.6 फीसदी लोगों ने कहा कि संकल्प जरूर लेना चाहिए, अगर वो गलत आदतों को छोड़ने से संबंधित हो।
इस सर्वेक्षण में भाग लेने वाली 7,547 महिलाओं से जब यह पूछा गया कि क्या वे अपने साथी की नए साल के संकल्प को पूरा करने में मदद करेंगी। तो 59.4 फीसदी ने कहा हां, 27.5 फीसदी ने कहा न और 27.5 फीसदी ने कहा कि देखेंगे।
सर्वेक्षण में शामिल महिलाओं से उनके खुद के संकल्प के बारे में पूछने पर 38.1 फीसदी ने कहा वे सोशल मीडिया पर कम समय बिताएंगी और अपने साथी को ज्यादा सयम देंगी। जबकि 28.5 फीसदी महिलाओं ने कहा कि वे अपने साथी के साथ ज्यादा घूमने जाएंगी। जबकि 33.4 फीसदी का कहना था कि उन्होंने व्यायाम करने और स्वस्थ जीवनशैली बिताने का संकल्प लिया है।
सर्वेक्षण में शामिल 9,025 पुरुषों से यह पूछा गया कि क्या वे अपने साथी की नए साल के संकल्प को पूरा करने में मदद करेंगे। 64.1 फीसदी का जवाब हां था, 17.3 फीसदी का जवाब न था और 18.6 फीसदी ने कहा कि सोचेंगे।
जब इन लोगों से खुद के संकल्प के बारे में पूछा गया तो 42.7 फीसदी लोगों ने कहा, “वे अपने साथी और पसंदीदा खेल के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेंगे।” 36.4 फीसदी लोगों ने कहा, “वे छुट्टियों के दिन सोने की बजाए साथी के साथ घूमने की योजना बनाएंगे।” जबकि 20.9 फीसदी का कहना था कि वे नए व्यंजनों को बनाना सीखेंगे।
शादी डॉट कॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव रक्षित ने एक बयान में कहा, “यह देखना दिलचस्प है कि किस तरह से लोगों की सोच बदल रही है। नए चलन से यह साफ जाहिर होता है कि अब लोग निजी फैसलों की बजाए मिलकर फैसला करने में ज्यादा यकीन रखते हैं।”
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