हैदराबाद, 23 जनवरी (आईएएनएस)। हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित शोध छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी पर विश्वविद्यालय में विरोध-प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को बेहद अपमानजनक करार दिया है, जिसमें उन्होंने वेमुला को ‘भारत माता का बेटा’ करार दिया है।
सामाजिक न्याय के लिए संयुक्त कार्रवाई कमेटी (14 विद्यार्थियों का एक समूह) ने प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी की निंदा की है।
संयुक्त कार्रवाई कमेटी (जेएसी) ने मुद्दे पर मोदी की चुप्पी तोड़ने के एक दिन बाद शनिवार को जारी एक बयान में कहा, “रोहित वेमुला तथा सामाजिक रूप से बहिष्कृत अन्य लोग हमेशा हिंदुत्व व मनुवादी राजनीति के खिलाफ खड़े रहे हैं, जिस विचारधारा के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मंत्री जाने जाते हैं।”
विश्वविद्यालय परिसर में विरोध-प्रदर्शन जारी रखने वाली जेएसी यह जानना चाहती है कि मोदी रोहित तथा अन्य शोध विद्यार्थियों के साथ हुए अन्याय के लिए भाजपा के मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे या नहीं।
सात छात्रों द्वारा किया जा रहा अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शनिवार को चौथे दिन में प्रवेश कर गया। इसके साथ ही निलंबित चारों दलित छात्र व अन्य विरोध-प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं।
जेएसी ने कहा कि पुलिस तथा विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिशें कर रहा है और उन्होंने ज्यादा से ज्यादा छात्रों से वहां पहुंचने की अपील की।
जेएसी ने 25 जनवरी को चलो हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय का आह्वान किया है और विद्यार्थियों, मजदूरों, कार्यकर्ताओं व समाज के अन्य बुद्धिजीवियों व प्रगतिशील तबके को विश्वविद्यालय पहुंचने की अपील की है।
उन्होंने प्रदर्शन को तब तक जारी रखने का फैसला किया है, जब तक कि रोहित की मौत के लिए जिम्मेदार सभी लोगों व पांचों दलित विद्यार्थियों के साथ अन्याय करने वाले लोगों को दंडित नहीं किया जाता।
उनकी मांग है कि केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय, कुलपति अप्पा राव तथा अन्य को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के तहत दंडित किया जाए।
वे कुलपति को बर्खास्त करने की भी मांग कर रहे हैं। साथ ही उनकी यह भी मांग है कि रोहित के परिजनों को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए व उसके परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
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