नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने अरुणाचल प्रदेश में 26 जनवरी को राष्ट्रपति शासन लगाने को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को केंद्र सरकार और अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा को नोटिस जारी किया।
न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर, न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर, न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष और न्यायमूर्ति एन.वी.रमण की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए 29 जनवरी तक इसका जवाब देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार (पहली फरवरी) को होगी।
अदालत ने याचिकाकर्ता अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस के मुख्य सचेतक राजेश ताचो को इस बात की आजादी दी कि वह अपनी याचिका में संशोधन कर इसमें राष्ट्रपति शासन की घोषणा को चुनौती दिए जाने को शामिल कर सकते हैं।
अदालत ने निर्देश दिया कि ताचो को उस तिथि की जानकारी दी जाए जिस तिथि को राजखोवा ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा करने वाली रपट दी थी।
सुनवाई की शुरुआत में वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस. नरीमन ने शीर्ष अदालत को बताया कि आखिरी सुनवाई के बाद अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया और राज्य के कामकाज में राज्यपाल की मदद के लिए दो सहायक भी नियुक्त कर दिए गए।
नरीमन ने कहा कि राज्यपाल के अधिवक्ता हरीश साल्वे ने 14 जनवरी की सुनवाई में कहा था कि स्थिति को बिगाड़ने के लिए कुछ भी अवांछित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बताया जाए कि राज्यपाल ने किस तिथि को अपनी रपट में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की।
अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि इस तिथि के बारे में जानना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह भी बताया जाए कि राजखोवा ने किन आधारों पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा की है।
याचिका का विरोध करते हुए महान्यायवादी मुकुल रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल की रपट गोपनीय है और इसे याचिकाकर्ता ताचो के साथ साझा नहीं किया जा सकता। लेकिन, उन्होंने कहा कि इसे पीठ के साथ साझा किया जा सकता है।
नरीमन ने रोहतगी की इस बात को गलत बताया कि राज्यपाल की रपट गोपनीय होती है। उन्होंने कहा कि एस.आर.बोम्मई मामले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि राज्यपाल की रपट गोपनीय नहीं होती।
न्यायमूर्ति लोकुर ने रोहतगी की बात का शीर्ष अदालत के उस फैसले के हवाले से खंडन किया जिसमें राज्यपाल की रपट पेश करने की बात कही गई थी।
रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल राजखोवा ने कई रपट भेजी है। इस पर न्यायमूर्ति रमण ने कहा कि राष्ट्रपति की घोषणा में तो केवल एक रपट का उल्लेख है।
महान्यायवादी ने राष्ट्रपति शासन लगाने के कैबिनेट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करने के औचित्य पर सवाल उठाए। इस पर अदालत ने कहा, “याचिका (राजेश ताचो की) में कितना वजन है, इस पर आप जवाब दें। आप इसे स्वीकार कर सकते हैं और नहीं भी कर सकते हैं।”
कांग्रेस ने 25 जनवरी को दायर अपनी याचिका में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अरुणाचल के राज्यपाल की अनुशंसा पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने को चुनौती दी है।
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