विशाखापत्तनम, 5 फरवरी (आईएएनएस)। देश के नौसेना प्रमुख एडमिरल आर.के.धवन ने शुक्रवार को कहा कि इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में स्वदेशी तकनीक से विकसित परमाणु सक्षम पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत शामिल नहीं की जाएगी।
यह पूछे जाने पर कि आईएफआर में पनडुब्बी को दिखाया जाएगा, तो नौसेना प्रमुख ने ‘नहीं’ में जवाब दिया।
छह हजार टन वजन वाली आईएनएस अरिहंत पनडुब्बी वर्तमान में समुद्री परीक्षण के अंतिम चरण में है।
नौसेना प्रमुख की बात से उन संभावनाओं पर विराम लग गया है, जिसके मुताबिक दुनिया भर की लगभग 50 नौसेनाओं के चार दिवसीय आयोजन के दौरान अरिहंत के प्रदर्शन की संभावना व्यक्त की जा रही थी।
समारोह की शुरुआत गुरुवार को यहां मेरीटाइम एक्जीबिशन व आईएफआर विलेज के उद्घाटन के बाद हुई।
भारतीय नौसेना के अधिकारी अतीत में भी कह चुके हैं कि वे आईएफआर में आईएनएस अरिहंत का प्रदर्शन करने को इच्छुक हैं, लेकिन वे समुद्री परीक्षण से समझौता नहीं कर सकते।
आईएनएस अरिहंत देश में स्वदेशी तकनीक से निर्मित पहली परमाणु पनडुब्बी है और परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों की अरिहंत श्रेणी के इस प्रथम पनडुब्बी को 2009 में लांच किया गया था।
इसका समुद्री परीक्षण साल 2012 में ही होनेवाला था, लेकिन यह दिसंबर 2015 में संभव हो पाया।
पनडुब्बी में लगा छोटा परमाणु रिक्टर रूस की मदद से बना है, जो साल 2013 में चालू होने की स्थिति में पहुंचा था।
इस परियोजना का संचालन निजी कंपनियों जैसे लार्सन एंड टूब्रो के अलावा, प्रधानमंत्री कार्यालय तथा एजेंसियां व संस्थान जैसे रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ), परमाणु ऊर्जा विभाग तथा डायरेक्टोरेट ऑफ नेवल डिजाइन की सबमरीन डिजाइन ग्रुप के तहत एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसेल प्रोग्राम द्वारा किया जा रहा है।
पनडुब्बी की डिजाइन रूसी अकुला-1 श्रेणी की पनडुब्बी और इसके 83 मेगावाट दाबयुक्त जल रिएक्टर पर आधारित है और रूस की सहायता से इसे बनाया गया है।
इसके 100 सदस्यीय चालक दल को रूस के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षित किया है, जबकि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ने इसके रिएक्टर का आकार छोटा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत के पास वर्तमान में रूस निर्मित परमाणु सक्षम पनडुब्बी आईएनएस चक्र है, जिसे रूस से साल 2012 में 10 वर्षो तक लीज पर लिया गया है।
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