नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान की पहली अकादमी पुरस्कार विजेता शरमीन ओबेद-चिनॉय का कहना है कि उनके देश में हजारों महिलाएं ‘ऑनर किलिंग’ का शिकार हुई हैं।
नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान की पहली अकादमी पुरस्कार विजेता शरमीन ओबेद-चिनॉय का कहना है कि उनके देश में हजारों महिलाएं ‘ऑनर किलिंग’ का शिकार हुई हैं।
अपने एक वृतचित्र के लिए ऑस्कर में नामित शरमीन ने कहा कि ‘ऑनर किलिंग’ के नाम पर कई महिलाओं को जलाकर, गोली मारकर और गला घोंटकर मार दिया जाता है।
शरमीन ने कराची से ई-मेल के जरिए एक साक्षात्कार में आईएएनएस से कहा, “मैं विश्व को यह संदेश देना चाहती हूं कि ‘ऑनर किलिंग’ पाकिस्तान में प्रचलित है, लेकिन यह हमारी संस्कृति या धर्म का हिस्सा नहीं है। मुझे लगता है कि हमारे लिए यह एक बड़ी जीत होगी, अगर हम इसके खिलाफ एकजुट होकर विरोध करें और एक ‘एंटी ऑनर किलिंग लॉ’ पास कराएं।”
‘एंटी ऑनर किलिंग लॉ (आपराधिक कानून संशोधन )’ विधेयक को मार्च, 2015 में सीनेट में पास किया गया था, लेकिन बाद में यह 2014 को संसद में पारित नहीं हो सका।
पाकिस्तान की जानी-मानी फिल्मकार का कहना है कि एक स्वर्ण प्रतिमा बनाए जाने के बजाए उनके लिए इस जघन्य अपराध के खिलाफ एक सख्त कानून पारित किया जाना सबसे बड़ी जीत होगी।
शरमीन की फिल्म ‘ए गर्ल इन रीवर : द प्राइस ऑफ फोरगिवनेस’ एक लड़की सबा मकसूद की कहानी है, जिसका एक ही कसूर होता है अपने पसंद के लड़के से प्यार करना। जिसके लिए उसका परिवार उसे गोली मारकर नदी में फेंक देते हैं, लेकिन वह बच जाती है।
इस फिल्म को ऑस्कर 2016 के वृतचित्र वर्ग में शामिल किया गया था, जिसने पाकिस्तानी सरकार की आंखे खोल दी।
शरमीन को बधाई देते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने एक ‘उचित कानून’ के साथ इस सामाजिक बुराई को देश से बाहर निकालने के लिए सरकार की ओर से प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इसके लिए शरमीन ने एक ऑनलाइन याचिका की शुरुआत की है, जिसमें उनका लक्ष्य इस याचिका को शरीफ के पास भेजने से पहले इस पर 5,000 हस्ताक्षर हासिल करना है।
शरमीन ने कहा कि पाकिस्तान में 2015 में ‘ऑनर किलिंग’ की कोई व्यापक सूची नहीं है, लेकिन 2015 में ‘ऑनर किलिंग’ के नाम पर करीब 1,005 लोगों की हत्या की गई थी। इसमें पुरुषों भी शामिल हैं, लेकिन महिलाएं इसकी सबसे अधिक शिकार होती हैं।
शरमीन ने 2012 में अपने वृतचित्र ‘सेव फेस’ के लिए ऑस्कर जीता था। इसमें उन्होंने पाकिस्तान की ‘एसिड अटैक’ पीड़िता की कहानी को दर्शाया था।
फिल्मकार का कहना है कि फिल्म के जरिए इस प्रकार के मुद्दों पर काफी गहरा प्रभाव पड़ता है और उनकी फिल्म ‘अ गर्ल इन रिवर..’ में उस दबाव को भी दर्शाया गया है, जिसे ‘ऑनर किलिंग’ से बचने वाला पीड़ित झेलता है।
शरमीन का कहना है कि उनके लिए यह महत्वपूर्ण था कि वह सबा की कहानी सच्चे और अलग ढंग से बताएं।
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