भोपाल, 8 फरवरी (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के विभिन्न शासकीय और स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों में ‘सेवारत अभ्यर्थी’ कोटे में प्रवेश करने वाले स्नातकोत्तर छात्र को भी छात्रवृत्ति मिलेगी। यह निर्णय सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया।
मंत्रिपरिषद ने निर्णय लिया कि शासकीय व स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों में ‘सेवारत अभ्यर्थी’ कोटे में प्रवेश प्राप्त करने वाले ऐसे छात्र, जिन्हें अध्ययन अवधि के दौरान किसी अन्य स्रोत से वेतन या मानदेय प्राप्त नहीं हो रहा है, उन्हें अन्य प्रवेशित छात्रों की भांति स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के दौरान छात्रवृत्ति का भुगतान किया जाएगा।
ज्ञात हो कि चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर (पीजी) करने वाले छात्रों को सरकार छात्रवृत्ति देती है।
यह भी निर्णय लिया गया कि ‘सेवारत अभ्यर्थी’ के रूप में प्रवेश पाने वाले सभी चिकित्सकों को स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद आदिवासी क्षेत्रों में उपाधि के लिए पांच और पत्रोपाधि के लिए तीन वर्ष की सेवा राज्य शासन के अधीन अनिवार्य रूप से देने के लिए उपाधि के लिए 30 लाख या पत्रोपाधि के लिए 20 लाख रुपये का बंधपत्र (बॉण्ड) भरना होगा।
मंत्रिपरिषद ने अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्थाओं व बालवाड़ियों में कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों को एक जनवरी, 1996 से पांचवां वेतनमान स्वीकृत करने तथा एरियर की राशि का भुगतान पांच वार्षिक किस्त में करने को मंजूरी दी।
मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में लोक निर्माण विभाग के सेतु परिक्षेत्र के कुल 32 पुल पर पथ कर वसूली एक अप्रैल, 2016 से बंद करने का निर्णय लिया। यह वह पुल हैं, जिन पर पथकर वसूल की जा रही है तथा ऐसे पुलों से पथकर के रूप में शासन को प्राप्त राजस्व 10 लाख रुपये से कम है।
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