कर छूट, ईंधन पर अनुचित कर समाप्त हो : माकपा

नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। सरकार को कंपनियों और धनाड्यों को दी जाने वाली कर छूट और पेट्रोल-डीजल के खुदरा मूल्य पर अनुचित कर समाप्त करनी चाहिए। यह बात बुधवार को मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कही।

माकपा के मुखपत्र ‘पीपल्स डेमोक्रेसी’ में प्रकाशित एक आलेख में कहा गया है, “केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को कंपनियों को दिए गए ऋण की वसूली करनी चाहिए और पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर अतिरिक्त कर लगाकर आम आदमी पर बोझ नहीं बढ़ाना चाहिए।”

पार्टी ने कहा कि सिर्फ जनवरी महीने में ही केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर तीन मर्तबा उत्पाद शुल्क बढ़ाया।

इस तरह से पेट्रोल पर प्रति लीटर 2.12 रुपये और डीजल पर प्रति लीटर 5.5 रुपये उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया। नवंबर 2014 से अब तक नौ बार उत्पाद शुल्क बढ़ाए गए, जिससे पेट्रोल का उत्पाद शुल्क प्रति लीटर 11.77 रुपये और डीजल का उत्पाद शुल्क प्रति लीटर 13.37 रुपये बढ़ गया है।

पार्टी ने कहा, “यह वृद्धि तब की गई है, जब दुनियाभर में कीमत घट रही है।”

पत्र में कहा गया है कि चूंकि भारत अपनी जरूरत के 80 फीसदी तेल का आयात करता है, इसलिए पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत में भारी गिरावट होनी चाहिए थी, जो नहीं हुई।

पार्टी ने कहा, “इसका कारण यह है कि (नरेंद्र) मोदी की सरकार ने शुल्क बढ़ाकर कीमतों में हुई गिरावट के अधिकांश हिस्से को हड़प लिया।”

माकपा ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने के बाद अब खुदरा मूल्य बाजार मूल्य पर आधारित होने चाहिए थे।

पार्टी ने कहा कि लेकिन उत्पाद शुल्क बढ़ाए जाने से सरकारी और निजी तेल कंपनियों को लाभ पहुंचा है।

पार्टी ने कहा, “यह कर कितना अनुचित है, इसका पता इसी तथ्य से चलता है कि एक लीटर पेट्रोल मूल्य में 57 फीसदी हिस्सा सरकारी कर का है और एक लीटर डीजल में 55 फीसदी हिस्सा कर का है।”

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