एनआईए ने गिरफ्तार आईएस संदिग्धों का इंटरनेट डाटा मांगा

नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने विभिन्न इंटरनेट सुविधा प्रदाताओं (आईएसपी) से कहा है कि वे आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) से संबंध के आरोप में गिरफ्तार लोगों द्वारा इस्तेमाल किए गए डाटा उपलब्ध कराएं।

नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने विभिन्न इंटरनेट सुविधा प्रदाताओं (आईएसपी) से कहा है कि वे आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) से संबंध के आरोप में गिरफ्तार लोगों द्वारा इस्तेमाल किए गए डाटा उपलब्ध कराएं।

इन संदिग्धों ने भारत में आईएस की विचारधारा को बढ़ावा देने और संगठन में नए लोगों की भर्ती करने के लिए सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल किया था। ये वाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल मीडिया की साइटों का धड़ल्ले से उपयोग करते थे।

एनआईए के सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने मंगलवार को अदालत से इन संदिग्धों की रिमांड मांगने के दौरान बताया कि ये संदिग्ध आतंकी इंटरनेट और इंटरनेट आधारित टेलीग्राम, केआईके और श्योरस्पॉट जैसी सुविधाओं का भी इस्तेमाल करते थे।

एनआईए ने कहा कि यह एक बहुत बड़े षड्यंत्र का परिणाम था। इसका मकसद इस वैश्विक आतंकी संगठन की गतिविधियों को भारत में बढ़ावा देना और देश-विदेश में रह रहे भारतीयों को आईएस सदस्य के रूप में भर्ती करना था।

सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि एनआईए ने कहा है कि आपराधिक मामलों में डाटा मुहैया कराने के लिए परस्पर कानूनी सहयोग समझौते (एमएलएटी) के तहत इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को आग्रह पत्र भेजा जा रहा है।

एनआईए ने अदालत से कहा है कि जानकारी मांगी गई है। इन अभियुक्तों और उनके सहयोगियों द्वारा इस्तेमाल किए गए इंटरनेट आधारित संचार के साधनों से मिले तथ्यों की जांच के लिए अभियुक्तों को हिरासत में रखने की जरूरत है।

सूत्रों के अनुसार, 29 जनवरी को इन अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद इनके पास से लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, मेमोरी कार्ड और पेन ड्राइव जैसे कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए थे।

इन उपकरणों को 4 फरवरी को इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम के फोरेंसिक विश्लेषकों को भेजा गया था।

बंद कमरे में चली अदालत की कार्यवाही के दौरान मंगलवार को जिला न्यायाधीश अमर नाथ ने एनआईए को शेख अजहर उल इस्लाम उर्फ अब्दुल सत्तार शेख, मुहम्मद फरहान उर्फ मुहम्मद रफीक शेख और अदनान हसन उर्फ मुहम्मद हुसैन नाम के तीन संदिग्धों से 19 फरवरी तक पूछताछ की इजाजत दे दी।

शेख अजहर जम्मू-कश्मीर से है जबकि फरहान और हसन क्रमश: महाराष्ट्र और कर्नाटक के रहने वाले हैं।

सूत्रों के अनुसार, एनआईए ने अदालत से कहा कि हिरासत की अवधि में इन अभियुक्तों से पूछताछ के दौरान इसके संकेत मिले हैं कि इनके आपस में तार जुड़े हुए हैं और इनका संबंध इस्लामिक स्टेट से है।

इन तीनों को पुलिस हिरासत खत्म होने के बाद अदालत में पेश किया गया था। इनके चेहरे ढंके हुए थे।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील एम.एस. खान ने हिरासत अवधि बढ़ाने के लिए दी गई एनआईए की दलील का विरोध किया। उनका कहना था कि जांच एजेंसी के पास पहले ही आरोपियों से पूछताछ के लिए काफी वक्त था।

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