नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण के नियमों पर अमल सुनिश्चित करने का आग्रह करने वाली एक याचिका पर शुक्रवार को केंद्र सरकार और दिल्ली के उप राज्यपाल (एलजी) को नोटिस भेजा। इन नियमों में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चलाने वालों को दंडित करने का प्रावधान है।
नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण के नियमों पर अमल सुनिश्चित करने का आग्रह करने वाली एक याचिका पर शुक्रवार को केंद्र सरकार और दिल्ली के उप राज्यपाल (एलजी) को नोटिस भेजा। इन नियमों में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चलाने वालों को दंडित करने का प्रावधान है।
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी और न्यायाधीश जयंत नाथ की पीठ ने केंद्र और उप राज्यपाल से 30 मार्च तक नोटिस का जवाब मांगा है। याचिका कंपेन फार पीपुल पार्टिसिपेशन इन डेवलपमेंट प्लानिंग नाम की स्वयंसेवी संस्था ने दायर की है।
याचिका में कहा गया है कि वाहनजनित प्रदूषण के बढ़ने की वजह प्रदूषण रोकने के नियमों पर अमल का नहीं होना है। याचिका में कहा गया है कि नियमों पर अमल के बजाए सड़क पर वाहनों की संख्या घटाना संभव नहीं है। याचिका में सरकार को यह आदेश देने का आग्रह किया गया है कि वह प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़क पर आने से रोके।
वकील अनिल अग्रवाल के जरिए दायर की गई इस याचिका में मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 190 पर अमल न होने को राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते जानलेवा प्रदूषण की वजह बताया गया है। इसमें सम-विषम योजना को भी निशाने पर लिया गया है।
याचिका में कहा गया है, “प्रतिवादी धारा 190 को लागू नहीं कर कर्तव्य की उपेक्षा के दोषी हैं। ये प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़क पर आने से रोकने के बजाए एक-एक दिन के अंतराल पर सम-विषम नंबर के वाहनों को चला कर वाहनों की संख्या कम करने में खुद को दुर्भावनापूर्ण ढंग से गुमराह कर रहे हैं। यह कानून के मूल उद्देश्य के ही खिलाफ है। “
याचिका में कहा गया है कि प्रदूषण जांच केंद्र पर होने वाली प्रदूषण जांच एक ढोकसला मात्र होती है। प्रमाणपत्र (पीयूसी) बिना किसी गंभीरता के जारी कर दिया जाता है। सरकार और उसकी एजेंसियां ये सब जानती हैं। याचिका में इन केंद्रों के औचक निरीक्षण की भी मांग की गई है।
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