पीएम की शिकायत हम किससे करें, बराक साहब तो सुनेंगे नहीं : आजम

विधानसभा मंे सूबे की राजधानी में मुख्यमंत्री और डीजीपी आवास के बीच एक नाबालिग लड़की का शव मिलने के मामले में जबरदस्त हंगामा हुआ। सदन की शुरुआत से ही वेल में पहुंचे भाजपा और कांग्रेस विधायकों ने जोरदार हंगामा किया तो वहीं नेता विरोधी दल स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने स्थान से ही 12वीं कक्षा की छात्रा का शव मिलने के मामले में चर्चा कराए जाने की मांग की।

उधर, भाजपा ने सरकार के मंत्री रामगोविंद चौधरी द्वारा सदन में दिए गए व्यापारी विरोधी बयान को लेकर मंत्री की बर्खास्तगी की मांग की और वेल में जमे रहे।

इसी बीच प्रदेश की बिगड़ी कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए सदन से पहले बसपा और फिर कांग्रेस बहिर्गमन कर गई।

सदन की कार्यवाही 11 बजे जैसे ही शुरू हुई। वेल में पहले से ही मौजूद भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने विषयों को लेकर हंगामा करना शुरू कर दिया। भाजपा जहां सरकार के मंत्री राम गोविंद चौधरी के सोमवार को दिए गए बयान (जिसमें उन्होंने व्यापारियों को टेढ़ी मार कहा था) पर मंत्री की बर्खास्तगी की मांग कर रहे थे।

मुख्यमंत्री आवास और पुलिस महानिदेशक के आवास के बीच जंगल में मिली 12वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा के शव को लेकर भी भाजपा वेल में अपनी नाराजगी जाहिर कर रही थी। उधर कांग्रेस नियम 311 की दी गई नोटिस के तहत सदन में छात्रा के शव मिलने पर विधानसभा की कार्यवाही रोककर चर्चा कराए जाने की मांग कर रही थी।

कांग्रेस और भाजपा के हंगामे के बीच नेता विरोधी दल स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि पूरे प्रदेश में जंगलराज चल रहा है। जिस तरह से राजधानी में आरएलबी की नाबालिग छात्रा का पहले अपहरण, दुष्कर्म और हत्या की गई, उससे सरकार की कानून-व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।

हालांकि बसपा के हंगामे को देख विधानसभा अध्यक्ष मात प्रसाद पांडेय ने कहा कि बसपा ने तो नियम-56 के तहत चर्चा का नोटिस दिया है। निमयों के तहत चर्चा हो जाएगी, लेकिन नेता विरोधी दल हंगामा करते हुए अपने दल के विधायकों के साथ सदन से बहिर्गमन कर गए।

विधानसभा की कार्यवाही को रोककर छात्रा का शव मिलने के मामले में चर्चा कराए जाने की मांग पर अनुमति न मिलने से नाराज कांग्रेस के नेता प्रदीप माथुर भी अपने दल के विधायकों के साथ वॉकआउट कर गए।

इस बीच भाजपा के नेता विधानमंडल दल सुरेश खन्ना ने कहा कि प्रदेश में जंगलराज कायम है। सरकार के मंत्री मंत्री रामगोविंद चौधरी ने व्यापारी समाज का अपमान किया और सरकार के किसी भी मंत्री ने चौधरी के व्यापारी विरोधी बयान पर अपनी असहमति नहीं जताई। ऐसे में मंत्री को बर्खास्त किया जाना चाहिए।

खास बात यह कि भाजपा, कांग्रेस और बसपा विधायकों के हंगामे को सुनने के बाद संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने देश के प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, “भाजपा के लोग कह रहे हैं कि मंत्री की शिकायत मुख्यमंत्री से करो तो हम पूछते हैं कि जब पीएम कुछ कहें तो हम किससे कहंे। जिन शब्दों का प्रयोग पीएम ने किया है, उसकी शिकायत हम किससे करें, बराक साहब तो हमारी सुनेंगे नहीं।”

उन्होंने कहा, “पीएम दिल्ली-बिहार चुनाव के दौरान में क्या-क्या कह चुके हैं उसकी भी तो शिकायत होनी चाहिए, लेकिन किससे करें आप ही बताइए।”

आजम ने कहा कि जो बड़े कहंेगे, उसे ही तो छोटे सीखेंगे। पीएम की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि पहले बड़े पर अंकुश लगाइए। भाजपा के लोग व्यापारियों की बात कर रहे हैं, जबकि न मुजफ्फरनगर और न देवबंद, कहीं भी व्यापारियों ने भाजपा को वोट नहीं दिया। सब जगह ये लोग हार रहे हैं।

उधर, वेल में खड़े भाजपा विधायक मंत्री की बर्खास्तगी की मांग पर हंगामा करते रहे। ऐसे में सदन को अव्यवस्थित देख विधानसभा अध्यक्ष ने दो बार 15 मिनट और फिर 11:45 बजे पूरे प्रश्नकाल की समाप्ति 12:20 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

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