नई दिल्ली, 18 फरवरी (आईएएनएस)। पेंटिंग मन की गहराइयों में उतरकर एक संदेश देती है। प्रकृति चित्रण हो या स्त्रीमन की संवेदनापूर्ण अभिव्यक्ति या फिर जिंदगी की बारीकियों को आकृतियों में ढालकर मन को भाव-विभोर करने वाली कलाकृति, यह कला-प्रेमी को न केवल अंदर तक छूती है बल्कि एक संदेश भी देती है।
कुछ ऐसा ही ऐहसास इन दिनों ललित कला अकादमी की गैलरी नं. 3 में देखा जा सकता है कलाकार हर्षवर्धन आर्य की एकल चित्र प्रदर्शनी ‘ममतामयी’ में।
हाल ही में इनकी प्रदर्शनी का उद्घाटन पद्मश्री राम वी. सुथर ने किया। मौके पर जे.के. गौर (जे.के. इंटरनेशनल के निदेशक व रोटेरी के डिस्ट्रीक गवर्नर), आलोक कुमार (दधीची डी.डी. समिति के अध्यक्ष), रोटेरियन शरत जैन, कलाकार रूपचंद, वीरेन्द्र कुमार जैन (सुंदरलाल जैन अस्पताल के मालिक) एवं अमरनाथ अमर सहित कई गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।
‘ममतामयी’ शीर्षक से आयोजित इस प्रदर्शनी में हर्षवर्धन आर्य ने ‘मां’ के असीम प्रेम, स्नेह व उसकी ममता को कैनवास पर प्रदर्शित किया है। इनकी पेंटिंग में स्त्री की गोद में शिशु का बारीकी से चित्रण एक ममतामयी मां की छवि को उकेरता है तो पोषण करने वाली मां की वात्सल्यता को गहनता से व्यक्त करता है।
मातृप्रेम की झलक के साथ मां की वात्सल्यता कहीं शिशु रूप कृष्ण के रूप में झलकती है तो कहीं बेटियों की सुरक्षा का प्रति बनकर ‘बेटी बचाओ’ अभियान का जीवंत चित्रण करती है।
इसके अतिरिक्त हर्षवर्धन ने मंगल मिशन की कामयाबी को प्रदर्शित करती हनुमान जी की उड़ान भरती पेंटिंग, प्रकृति संरक्षण को समर्पित पेंटिंग और देहदान जैसे विषयों को केन्द्र बनाया है। ये सभी पेंटिंग मानव को संदेश देती हैं कि उसे वातावरण को सुरक्षित हरहाल में रखना है।
हर्षवर्धन आर्य एक संवेदनशील कवि भी हैं, अत: इनकी भावनाएं कविताओं के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी बातों को ²श्यों और बिंबों के माध्यम से चित्र रूप में उकेर पाने में पूर्णत: सफल हैं। इनकी पेंटिंगें विभिन्न रंगों वाली आकर्षक छट बिखेरती है तो केवल ब्लैक पेन से भी उकेरी गई हैं, जो कि कुछ न कुछ संदेश अवश्य देती हैं।
मौके पर श्री राम सुथर ने हर्षवर्धन की प्रशंसा की। विशेषकर जिस तरह से उन्होंने विषय के अनुरूप पेंटिंग तैयार की हैं और उनको जीवंत किया है।
कलाकार रूपचंद ने बताया कि जब आप इनके काम को देखेंगे तो आप महसूस करेंगे कि कितनी सादगी है काम में और विषय का खूबसूरत चित्रण देखने को मिलता है। इनकी पेंटिंग मन को सुकून देती हैं और दिल को छूती हैं।
वहीं हर्षवर्धन आर्य ने कहा कि सारी दुनिया एक अजीब तरह के माहौल में है। कहीं दंगल है, तो कहीं तनाव या फिर रोजमर्रा की भाग-दौड़ और सबसे दूर होता इंसान। वैलेंनटाईन डे सब मना रहे हैं लेकिन दुनिया में ‘मां’ का अस्तित्व सबसे बड़ा है और मेरा मानना है कि वैलेनटाईन दिवस के माध्यम से अगर प्यार को ही तवज्जो देनी है तो क्यों न ‘मां’ को केन्द्र बनाकर इस दिन को मनाया जाये, इसी के चलते ‘ममतामयी’ के माध्यम से मैंने एक प्रयास किया है।
‘ममतामयी’ शीर्षक से आयोजित यह प्रदर्शनी ललित कला अकादमी में 19 फरवरी तक जारी रहेगी, जिसके बाद यह अशोक विहार फेस 1 स्थित रूपचंद आर्ट गैलरी में 21 से 28 फरवरी तक आयोजित की जायेगी।
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