112 देशों के लोगों ने देखा राष्ट्रीय संग्राहलय का पोर्टल ‘अभिलेख’

नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री डॉ. महेश शार्म ने शुक्रवार को यहां भारतीय राष्ट्रीय संग्रहालय के 125 वें स्थापना दिवस पर चलने वाले वर्षभर चलने वाले समारोहों के समापन पर आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय राष्ट्रीय संग्रहालय (एनएआई) का प्रतीक-चिन्ह जारी किया। उन्होंने कहा कि यह बहुत उत्साहवर्धक है कि 112 देशों के लोगों ने हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को जानने के लिए पिछले साल जारी ‘अभिलेख’ पोर्टल को देखा।

उन्होंने एनएआई पर 125 रुपये का एक स्मारक सिक्का और 10 रुपये का एक चलन (सरकुलेटिंग) का सिक्का, एनएआई दो प्रकाशनों- एनएआई के उपर 125 चुने हुए दस्तावेजों पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक तथा एनएआई से जुड़े लोगों के संस्करणों पर आधारित एक पुस्तक ‘पास्ट ऑफ दी फ्यूचर’ जारी की।

इस अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पारिवारिक सदस्या नीता घोष ने डॉ. महेश शर्मा को एक डीवीडी भेंट की। इस डीवीडी में नेताजी के भाई अमिय नाथ बोस द्वारा उन्हें लिखे गए निजी पत्रों का संकलन है। यह डीवीडी डॉ. महेश शर्मा को पत्रों को संरक्षित करने और उपयोगकर्ताओं के परामर्श के लिए भेंट की गई।

इस अवसर पर डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि यह बहुत उत्साहवर्धक है कि 112 देशों के लोगों ने हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को जानने के लिए पिछले साल जारी ‘अभिलेख’ पोर्टल को देखा। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान के लिए उसके 125 वर्ष पूरे होने के समारोह यादगार होते हैं। एनएआई हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करता है और युवाओं तथा अनुसंधानकर्ताओं को दिशा-निर्देश प्रदान करता है।

23 जनवरी 2016 को सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित फाइलों को जनता के लिए खोल दिया था और इसमें एनएआई ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इतिहास किसी भी समाज की आधारशिला होता है और भविष्य का रास्ता तय करने के लिए हमें इतिहास में ही विकास और सुशासन के सूत्र मिलते हैं।

संस्कृतिक सचिव एन.के. सिन्हा ने एनएआई के परिसर में 7 मार्च को ‘इंडिपेंडेंट इंडिया: ए फॉरवर्ड मार्च’ नामक प्रदर्शिनी का उद्घाटन करके समापन समारोहों की शुरूआत की। इस प्रदर्शनी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे गए हैं, जिनका आम जनता 8 अप्रैल तक सुबह साढ़े दस बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक अवलोकन कर सकती है।

18वीं और 19वीं शताब्दियों के संसाधनों पर भी एक दो दिवसीय संगोष्ठि का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों और अकादमिशियनों ने विचारपरक आलेख पढ़े।

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