नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। देश की सभी राज्य ट्रांसमिशन कंपनियों में ट्रांसको की आय सबसे अधिक व पारेषण हानि सबसे कम है। लेकिन पिछले कुछ सालों से बिजली वितरण कंपनियां बी.एस.ई.एस. राजधानी पावर लिमिटेड व बी.एस.ई.एस. यमुना पावर लिमिटेड द्वारा दिल्ली ट्रांसको के ट्रांसमिशन चार्जेज का भुगतान नहीं किए जाने के कारण आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह जानकारी ट्रांसको ने एक बयान जारी कर दी है।
बयान में कहा गया है कि दिल्ली ट्रांसको की देश की सबसे बेहतरीन राज्य ट्रांसमिशन कंपनियों में गणना की जाती है। साल 2002 में दिल्ली के बिजली क्षेत्र के पुर्नगठन के समय से ही दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड दिल्ली में सुचारू रूप से बिजली का पारेषण कर रही है।
बयान के मुताबिक दिनांक 29 फरवरी 2016 तक बी.एस.ई.एस. राजधानी पर कुल 1170.89 करोड़ रुपये तथा बी.एस.ई.एस. यमुना पर 787.16 करोड़ रुपये बकाया है। चूंकि यह कंपनियां केवल आंशिक भुगतान कर रही है इसलिए अक्टूबर 2010 से इकट्ठा होकर यह राशि बढ़ कर इतनी हो गई है।
इसमें बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश दिनांक 26 मार्च 2014 में बिजली कंपनियों को 1 जनवरी 2014 से चालू बकाया राशि का नियमित भुगतान करने को कहा था। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने दिनांक 6 मई 2014 व 3 जुलाई 2014 के आदेश में भी इसी बात को दोहराया था। लेकिन बी.एस.ई.एस. राजधानी व यमुना अपने चालू बकाया का भी भुगतान नहीं कर रही है।
1 जनवरी 2014 से 29 फरवरी 2016 के बीच की अवघि की राशि इकट्ठे होकर क्रमश: 444.24 करोड़ व 325.55 करोड़ रुपये हो गयी है। इस संबंध में दिल्ली ट्रांसको ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायालय की अवमानना की याचिका दाखिल कर रखी है जिसकी अगली सुनवाई 4 अप्रैल 2016 को होनी है।
ट्रांसको ने कहा कि बीएसईएस राजधानी व बीएसईएस यमुना पावर लि. द्वारा बकाया राशि का भुगतान नहीं किये जाने के कारण दिल्ली ट्रांसको को अपना काम ठीक से करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
पैसे नहीं होने के कारण दिल्ली ट्रांसको अपनी वैधानिक दायित्वों जैसे टैक्स व कर्मचारियों के वेतन के भुगतान आदि को भी सही ढंग से पूरा नहीं कर रही है जिससे भविष्य में काफी दिक्कतें आ सकती है। इसके अलावा दिल्ली ट्रांसको के संचालन व रख-रखाव आदि में भी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है जिससे आने वाली गर्मी में विद्युत आपूर्ति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है तथा नागरिकों को अकारण असुविधा हो सकती है।
कंपनी के मुताबिक दिल्ली ट्रांसको को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बैंक एवं अन्य वित्तीय स्त्रोतों से ऋण लेना पड़ रहा है। बीएसईएस की दोनों कंपनियों से नियमित भुगतान मिलने के कारण बैंक आदि से भी ऋण मिलना मुश्किल हो रहा है।
बयान में कहा गया है कि बीएसईएस राजधानी व बीएसईएस यमुना दोनों केन्द्र सरकार की विद्युत उत्पादन कंपनियों व अपने ग्रुप की कंपनियों को भी समय पर देय राशि का भुगतान कर रहा है। केवल ये कंपनियां दिल्ली ट्रांसको को भुगतान नहीं कर रही है।
इन कंपनियों का यह रवैया भेदभावपूर्ण व गलत है तथा दिल्ली के विद्युत क्षेत्र के व्यापक हित में अनुचित है। दिल्ली ट्रांसको के पास अन्य विकल्प यह है कि वह बीएसईएस की कंपनियों की बिजली आपूर्ति नियंत्रित करे लेकिन यह जन सामान्य के हित में नहीं है जो कि अपना बिजली का बिल नियमित रूप से दे रहे हैं।
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