नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि उनकी सरकार बैंकों के वित्तीय तनाव का स्थायी समाधान करने के लिए इसकी बुनियादी समस्या, यानी, इस्पात, चीनी, बिजली और राजमार्ग क्षेत्र की कंपनियों की सीमा से अधिक कर्जधारिता से निपटेगी।
आम बजट 2016-17 पर लोकसभा में बहस का जवाब देते हुए जेटली ने कहा कर्ज नहीं चुकाए जाने के मामले से कानूनी तरीके से निपटा जाएगा।
उन्होंने कहा, “लेकिन कुछ दूसरे कारण भी हैं, जिसके कारण बैंकिंग प्रणाली में गैर निष्पादित परिसंपत्तियों का स्तर बढ़ गया है।”
जेटली ने कहा कि इस्पात क्षेत्र में चीन द्वारा की जा रही डंपिंग एक समस्या है। चीन क्षेत्र में वैश्विक मूल्य कम होना समस्या है। बिजली क्षेत्र में कुछ राज्यों द्वारा लागत से कम दर पर बेचने का फैसला एक समस्या है, जिसके कारण वितरण कंपनियां ऋण लेने के लिए बाध्य हैं। राजमार्ग क्षेत्र में नीतियों के बुरे कार्यान्वयन से समस्या पैदा हुई है।
उन्होंने कहा, “लेकिन इन सभी मामलों से समुचित नीतिगत तरीके से निपटा जाएगा।”
उन्होंने कहा एंटी डंपिंग शुल्क और इस्पात के ऊंचे न्यूनतम आयात मूल्य, चीनी पर ऊंचा आयात शुल्क और बिजली वितरण कंपनियों के लिए उदय डिस्कॉम के कर्ज पुनर्गठन पैकेज जैसे उनकी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का जिक्र किया।
संसद में गत सप्ताह कहा गया था कि सरकारी बैंकों का एनपीए मौजूदा कारोबारी साल के प्रथम नौ महीने में करीब एक लाख करोड़ रुपये बढ़ गया है।
dharmpath.com dharmpath