‘आधार विधेयक का उद्देश्य निजता की सुरक्षा, सही व्यक्ति को सब्सिडी देना’ (लीड-1)

नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा कि आधार विधेयक नागरिकों की निजता की कड़ी सुरक्षा करता है और इसका उद्देश्य सही हितग्राही तक सब्सिडी का लाभ पहुंचाना है।

राज्यसभा में आधार विधेयक, 2016 को पेश करते हुए उन्होंने विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

उन्होंने कहा, “इस विधेयक का मूल सरकारी धन को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा व्यय किया जाना है। जब आप इस पैसे को सही आदमी तक पहुंचना सुनिश्चित करते हैं, तो आपको आदमी की पहचान पर जोर देना होता है।”

मंत्री ने कहा, “यदि सब्सिडी बिना पहचान किए लोगों को दी जाती है, तो इसका फायदा ऐसे लोगों को मिलता है, जो इसे पाने की योग्यता नहीं रखते। इसलिए, सही लोगों तक सब्सिडी का लाभ पहुंचाने के लिए यूआईडी या कोई अन्य वैकल्पिक दस्तावेज पूर्व शर्त है।”

उल्लेखनीय है कि राज्यसभा में आधार विधेयक को धन विधेयक के रूप में पेश करने पर विपक्षी सदस्यों ने इसकी वैधता पर सवाल उठाया था और इसे उच्च सदन में पेश करने को लेकर विरोध किया था।

सदन के उप सभापति पी.जे.कुरियन ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मुद्दे पर फैसला दिया है और इस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि भूलवश इसे धन विधेयक में परिवर्तित कर दिया गया है।

अग्रवाल ने कहा, “यह विधेयक धन विधेयक के एक भी शर्त को पूरा नहीं कर रहा है। राज्यसभा एक स्वतंत्र सदन है। हमें इसे पलटने का अधिकार है।”

कुरियन ने कहा, “लोकसभा अध्यक्ष ने क्या किया है, उस पर हम कोई फैसला नहीं दे सकते। संविधान में स्पष्ट है-अध्यक्ष का फैसला अंतिम होता है।”

उन्होंने कहा, “मैं अध्यक्ष से सवाल पूछने वाला कौन होता हूं न ही आप। जहां तक मेरी समझ है, तो यह एक धन विधेयक है।”

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सचिव सीताराम येचुरी ने भी कहा कि यह विधेयक संविधान में प्रदत्त निजता के अधिकार का हनन करता है।

येचुरी ने कहा, “संविधान हमें जीवन व स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। स्वतंत्रता में निजता निहित है। यह विधेयक निजता का हनन करता है।”

माकपा नेता ने कहा, “यह विधेयक सदन की विधायी क्षमता से परे है।” उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय भी मामले को देख रहा है।

येचुरी ने कहा, “मुद्दे की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने एक पांच सदस्यीय पीठ का गठन किया है।”

कुरियन ने हालांकि कहा, “यहां विधायी क्षमता का प्रश्न नहीं है, क्योंकि विधेयक को लोकसभा पारित कर चुका है और हम इसपर ध्यान देने के लिए बंधे हुए हैं।”

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार का काम कानून बनाना है।

उन्होंने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय मुद्दे पर विचार कर रहा है और इसलिए संसद को इस पर कानून बनाने की प्रक्रिया को निलंबित कर देना चाहिए। यह एक अप्रत्याशित बहस है, खासकर लोकतंत्र में, जो शक्तियों के विभाजन द्वारा शासित होता है। कानून बनाने की प्रक्रिया संसद की है। यह संसद का मामला नहीं है।”

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