अगरतला, 18 मार्च (आईएएनएस)। शत्रुवत तत्वों और सक्रिय विरोधी संगठनों से निपटने के लिए बांग्लादेश को भारतीय समर्थन चाहिए। यह बात बांग्लादेश मुक्ति युद्ध मामले के मंत्री ऐ.के.एम. मोजम्मल हक ने कही।
हक ने गुरुवार की देर शाम एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में कहा, “देश में सक्रिय शत्रुवत और विरोधी संगठनों से निपटने के लिए बांग्लादेश को अब भी भारत सरकार और वहां के लोगों के पूर्ण समर्थन की जरूरत है।”
मंत्री ने कहा कि जो लोग बांग्लादेश को स्वतंत्र नहीं देखना चाहते, वे अब भी आवामी लीग नीत सरकार के खिलाफ तरह- तरह के षड्यंत्र करते हैं। ये लोग बांग्लादेश का विकास बाधित करने और शांति भंग करने के लिए तरह की हिंसक गतिविधयां संचालित करने को तानाबाना बुनते हैं।
हक ने कहा, “1971 में बांग्लादेश के आजाद होने के बावजूद मुक्ति विरोधी ताकतें विगत 30 वर्षो से वहां सक्रिय हैं, जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और एच.एम. इरशाद तथा प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने खूब पाला-पोशा।”
मंत्री ने कहा कि 1971 में आजादी की लड़ाई के दौरान एक करोड़ लोगों को भोजन देने, पाकिस्तानी सेना से लड़ने के लिए मुक्ति योद्धाओं को प्रशिक्षण और हथियार देने के लिए ढाका सदैव भारत का ऋणी रहेगा।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश उन शहीद भारतीय सैनिकों का आभारी रहेगा, जिन्होंने बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए अपनी जान की बलि चढ़ा दी।
हक ने कहा, “हमारी सरकार भारत में आठ जगहों पर शहीद सैनिकों के सम्मान में संस्मरण समारोह ओजित करने तथा उनके परिवार को वित्तीय सहायता देने का फैसला पहले ही कर चुकी है।”
हक ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार के साथ बांग्लादेश के संस्थापक और बंगबंधु के नाम से मशहूर दिवंगत नेता शेख मुजीब-उर-रहमान पर लिखी दो पुस्तकों का विमोचन किया।
उल्लेखनीय है कि प्रसिद्ध भारतीय लेखक और शोधकर्ता देबब्रत देब ने शेख मुजीब के जीवन, कृतित्व और नेतृत्व पर दो पुस्तकें लिखी हैं। यहां गुरुवार को शेख मुजीब की 97वीं जंयती मनाई गई।
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