भोपाल, 26 मार्च (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की पोलित ब्यूरो सदस्य और पूर्व सांसद सुभाषिणी अली ने यहां शनिवार को भाजपा की केंद्र और मध्यप्रदेश की सरकारों पर आरोप लगाया कि इनकी नीतियां ऐसी हैं, जिससे आम आदमी के जनतांत्रिक अधिकार घट जाएंगे।
माकपा के प्रदेश मुख्यालय में शनिवार को संवाददाताओं से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों सरकारें जनता पर महंगाई, बेरोजगारी और अप्रत्यक्ष कर्ज का बोझ बढ़ा रही हैं, साथ ही कल्याणकारी योजनाओं में जबरदस्त कटौती कर आम आदमी पर जबर्दस्त प्रहार कर रही हैं।
सुभाषिणी ने कहा, “मोदी और शिवराज की सरकारें जनता के आक्रोश से भविष्य में अपना बचाव करने के लिए जनतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने के तमाम रास्ते भी ढूंढ़ रही हैं।”
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सरकार ने अपने हाल में पेश किए गए बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला कल्याण (जिसमें आंगनवाड़ी जैसी योजनाएं भी शामिल हैं), अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण तथा मनरेगा जैसे मदों के लिए धन आवंटन में भारी कटौतियां की हैं।
पूर्व सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार ने जनतांत्रिक अधिकारों पर कई तरह के हमले किए हैं। आधार विधेयक को वित्त-विधेयक बनाकर पेश किया गया। इस पर राज्यसभा में चर्चा कराने की संसदीय परंपरा का उल्लंघन करते हुए इसे लोकसभा में पारित कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि इसी तरह दफा 124 का बहुत ही गलत इस्तेमाल कर अपने से अलग विचार रखने वालों पर देशद्रोह का इल्जाम लगाकर विरोधियों को भयभीत और खामोश करने की जबर्दस्त कोशिश की जा रही है। यह जनतांत्रिक अधिकारों का हनन नहीं तो और क्या है।
सुभाषिणी ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश सरकार भी इन्हीं नीतियों को लागू कर रही है। मजदूरों के अधिकारों को सीमित और निष्प्रभावी करने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों और आदिवासियों की जमीन उनसे छीनने की प्रदेश भर में कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में दलित छात्रों की छात्रवृत्ति रोकी जा रही है। ये दोनों सरकारें जनतांत्रिक अधिकारों पर हमले के ऐसे तरीके अपना रही हैं जो शायद अंग्रेजों को भी नहीं सूझे थे।
सुभाषिणी अली ने कहा कि भाजपा सरकार मध्यप्रदेश में आम सभाओं और प्रदर्शनों को कानूनी तरीके से रोककर प्रदेश की जताता के आक्रोश को दबाने का प्रयास कर रही है।
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