मेले को लेकर चल रहीं तैयारियां अंतिम चरणों में हैं। यहां की ऐसी मान्यता है कि सिद्धबाबा मंदिर का भभूत फोड़ा-फुंसी पर लगाने से ठीक हो जाते हैं समूचे शरीर पर मलने से असाध्य चर्म रोगों से छुटकारा मिलता है। यहां प्रति वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु चढ़ावा चढ़ाने के लिए आते हैं।
सिद्धबाबा मंदिर का विकास वर्ष 1990 से शुरू हुआ। इसके पहले यहां पर ठहरने के लिए धर्मशाला व बिजली व्यवस्था का अभाव था। इस कारण यहां आने वाले श्रृद्धालुओं को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। यह सिद्धबाबा मंदिर पहाड़ियों पर बना हुआ है।
प्राचीन समय में पहाड़ी पर छोटी सी मड़िया बनी हुई थी, जो अब विस्तारित होकर एक भव्य मंदिर का रूप ले चुकी है। साथ ही धर्मशाला व पेयजल के लिए हैंडपम्प आदि दर्शनार्थियों को सुविधा मुहैया कराई गई है।
इसके अलावा राखपंचमपुर आवागमन के लिए मार्ग बने हुए हैं। यहां दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु माथा टेकने के लिए आते हैं। ललितपुर से दर्शनार्थियों को सीधी बस सुविधा मिलती है। रंगपंचमी के दिन दैलवारा व जखौरा रेलवे स्टेशनों पर अधिकांश ट्रेनों का ठहराव भी होता है।
प्रशासन द्वारा क्षेत्र में मेला को देखते हुए बिजली, पानी आपूर्ति के अलावा सड़क को दुरुस्त किया जा रहा है।
सिद्धबाबा मंदिर पर ग्राम प्रधान लाखन सिंह यादव ने बताया कि रंगपंचमी के दिन भव्य गाजे-बाजे के साथ सुबह 11 बजे विमान यात्रा निकाली जाएगी, जो पूरे गांव में घूमते हुए अपराह्न् 1 बजे सिद्ध बाबा मंदिर पर पहुंचेगी एवं विमान यात्रा में भगवान शंकरजी के स्वरूप किशोरीलाल पंथ आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
25 मार्च से 31 मार्च तक सुबह 9 से 11 बजे तक एवं शाम 5 से 7 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है।
ग्राम नंदीपुरा से पधारी कथा वाचक कुमारी रचना श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कराएंगी और सिद्ध बाबा मंदिर व मेला परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
पुलिस अधीक्षक मोहम्मद इमरान ने बताया कि मेला परिसर में चप्पे-चप्पे पर बड़ी संख्या में पुरुष व महिला पुलिस बल तैनात किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं के साथ कोई भी अप्रिय घटना न घट सके।
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