तिरुनेलवेली, 27 मार्च (आईएएनएस)। कंप्यूटर एप्लीकेशन में स्नातक (बीसीए) की डिग्री हासिल करने के बाद तिरुनेलवेली जिले के करिसलपट्टी पंचायत के 23 वर्षीय जी. नेल्सन चिन्नादुरई ने अपने पारिवारिक पेशे खेती को अपना लिया है।
तिरुनेलवेली, 27 मार्च (आईएएनएस)। कंप्यूटर एप्लीकेशन में स्नातक (बीसीए) की डिग्री हासिल करने के बाद तिरुनेलवेली जिले के करिसलपट्टी पंचायत के 23 वर्षीय जी. नेल्सन चिन्नादुरई ने अपने पारिवारिक पेशे खेती को अपना लिया है।
चिन्नादुरई ने आईएएनएस से कहा, “मैंने नौकरी तलाशने की अपेक्षा खेती करने का फैसला किया।”
उन्होंने बताया कि गांव के जलागम कार्यक्रम ने भी उनके फैसले में बड़ी भूमिका निभाई है। सुंदरम-क्लेटन लिमिटेड, टीवीएस मोटर कंपनी लिमिटेड और कोका-कोला इंडिया फाउंडेशन इस गांव में जलागम क्षेत्र परियोजना के क्रियान्वयन में लगे हुए हैं।
इस क्षेत्र में खेती बारिश पर निर्भर है। यहां के एक किसान टी. जयराज ने आईएएनएस से कहा, “एक अन्य समस्या यह है कि यह क्षेत्र ढलान पर स्थित है और बारिश का जल बिना मिट्टी में प्रवेश किए बह जाता है।”
उन्होंने बताया कि किसान साल में सिर्फ एक ही फसल उगा पाते थे, इसलिए यहां के लोग आजीविका के लिए पलायन करने लगे।
श्रीनिवासन सर्विसिस ट्रस्ट (एसएसटी) के अध्यक्ष अशोक जोशी ने आईएएनएस से कहा, “पलायन का संस्कृति पर प्रभाव पड़ता है। पलायन करने वालों का रवैया बदल जाता है और उसी तरह से गांव में बचे लोगों का भी रवैया बदल जाता है। कुल मिलाकर मूल संस्कृति बदल जाती है।”
एसएसटी आर्थिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, अवसंरचना और पर्यावरण जैसे पांच क्षेत्रों में काम करता है।
एसएसटी ने 2014 में इस जिले में जलागम परियोजना के लिए कोका-कोला फाउंडेशन से हाथ मिलाया।
जोशी ने कहा, “फाउंडेशन ने परियोजना के लिए 1.75 करोड़ रुपये दिए। हमने पानी बह जाने से रोकने के लिए चेक डैम बनाए, ढलुआ भूमि को समतल किया, तालाब खोदे और किसानों को ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने में भी मदद की।”
जयराज ने कहा, “परिणामस्वरूप खेत का कुल आकार एक एकड़ से बढ़कर पांच एकड़ हो गया है।”
जयराज के मुताबिक, “पहले 60 फुट नीचे पानी मिलता था। अब यह 20 फुट पर मिल जाता है।”
22 मार्च को विश्व जल दिवस के मौके पर कोका-कोला फाउंडेशन ने अपनी 150वीं जल संरक्षण संरचना (चेक डैम) जिले के चेरनमहादेवी पंचायत संघ के समुदाय को सौंपी है।
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