अगरतला, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। वाणिज्यिक विवादों को समय सीमा के भीतर निपटाने के लिए त्रिपुरा सरकार सभी आठ जिलों में शीघ्र वाणिज्यिक अदालतें स्थापित करेगी। यह जानकारी मंगलवार को यहां एक अधिकारी ने दी।
पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों में त्रिपुरा पहला राज्य होगा, जहां वाणिज्यिक अदालतें स्थापित होंगी।
उल्लेखनीय है कि गत साल दिसंबर में संसद में वाणिज्यिक अदालतें, वाणिज्यिक खंडपीठ, उच्च न्यायालय अपीली वाणिज्यिक खंडपीठ विधेयक पेश किया गया था, जो इस साल जनवरी में कानून बन गया। इस कानून के अनुसार एक करोड़ रुपये से अधिक के वाणिज्यिक विवाद की सुनवाई संबद्ध उच्च न्यायालय की वाणिज्यिक खंडपीठ या वाणिज्यिक अदालत में होगी।
त्रिपुरा के विधि सचिव ए.के.नाथ ने आईएएनएस से कहा, “हमलोगों ने त्रिपुरा उच्च न्यायालय से सभी आठ जिलों में वाणिज्यिक अदालतों की स्थापना के लिए अधिसूचना जारी करने का निवेदन किया है।”
अधिकारी के अनुसार, त्रिपुरा के आठ जिलों में पांच में जिला न्यायालय हैं, जबकि तीन में अतिरिक्त जिला अदालतें चल रही हैं।
नाथ ने कहा, “राज्य में वाणिज्यिक अदालतों की स्थापना के लिए उच्च न्यायालय पहले से ही राजी है।”
कानून के अनुसार, बैंक, बीमा, व्यवसायियों के बीच लेन-देन, वित्तदाताओं और व्यापारियों, व्यावसायिक दस्तावेजों जैसे संयुक्त उपक्रम और साझेदारी समझौतों से संबंधित विवादों को वाणिज्यिक विवाद माना गया है।
अधिनियम के तहत सभी वाणिज्यिक विवादों को प्रस्तावित अदालत में अधिकतम 18 महीने के भीतर सुलझाना होगा।
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने 2015 में बजट पेश करने के दौरान कहा था कि विधि आयोग की 23वीं रपट की अनुशंसा के अनुसार, वाणिज्यिक विवादों के त्वरित निपटारे के लिए सरकार भारत के विभिन्न न्यायालयों में खासतौर से वाणिज्यिक खंडपीठ की स्थापना का प्रस्ताव करती है।
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