प्रधानमंत्री के खिलाफ जेपीसी जांच की कांग्रेस की मांग

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी रपट में कहा है कि केजी बेसिन गैस ब्लॉकों में अब तक कोई व्यावसायिक उत्पादन नहीं हुआ है। इस परियोजना में तत्कालीन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार ने करीब 19 हजार 576 करोड़ रुपये निवेश किए थे। कांग्रेस ने मंगलवार को इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग की।

कैग की रपट गुजरात विधानसभा में गत 31 मार्च को पेश की गई थी। कैग ने इस परियोजना की वित्तीय लाभप्रदता पर भी सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता और राज्यसभा के उप नेता आनंद शर्मा ने कहा, “करीब 20 हजार करोड़ रुपये सरकारी धन के नुकसान की जवाबदेही नरेंद्र मोदी को निश्चित रूप से लेनी चाहिए। जैसा वह दूसरों पर लागू करते हैं, वैसे ही मानक के तहत उन्हें खुद को भी जवाबदेह मानना चाहिए और कैग के निष्कर्षो के आधार पर खुद को जेपीसी जांच के हवाले करना चाहिए।”

शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ जांच केवल जेपीसी से ही की जा सकती है, क्योंकि सभी जांच एजेंसियां उन्हीं के अंदर आती हैं। उन्होंने कहा, “हम जेपीसी गठित करने की मांग करते हैं, क्योंकि दूसरे किसी भी तरह से प्रधानमंत्री के खिलाफ जांच निष्पक्ष ढंग से नहीं की जा सकती।”

कांग्रेस पार्टी के एक सूत्र ने कहा कि यह भविष्य के लिए कांग्रेस का संसदीय एजेंडा होने जा रहा है।

वर्ष 2005 के जून में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (जीएसपीसी) द्वारा केजी बेसिन में 20 खरब घन फीट गैस का पता लगाने की घोषणा की थी। जिसका कुल मूल्य दो लाख 20 हजार करोड़ रुपये बताया था।

कैग की रपट में कहा गया है कि डीडब्यूडी ने वर्ष 2014 में परीक्षण के तौर पर गैस उत्पादन किया था, लेकिन औसत उत्पादन प्रतिदिन 19.45 एमएमएससीएफडी (मिलियन स्टैन्डर्ड क्यूबिक फीट ऑफ गैस पर डे) था, जबकि निर्धारित व्यावसायिक उत्पादन का लक्ष्य 200 एमएमएससीएफडी का था। इसका व्यावसायिक उत्पादन पिछले साल नवंबर तक नहीं शुरू हो पाया था, क्योंकि उत्पादन दर अभी तक तय नहीं हुआ है।

इसमें यह भी कहा गया है कि नया घरेलू प्राकृतिक गैस मूल्यांकन दिशा निर्देश 2014 के अनुसार, मौजूदा बाजार की स्थिति को देखते हुए इस परियोजना का व्यावसायिक उत्पादन अब भी संदेह के घेरे में है।

रपट में यह भी कहा गया है कि जीएसपीसी ने 19 हजार 576 करोड़ रुपये इसमें जोखिम, निर्माण की तकनीकी और प्राकृतिक गैस की मात्रा या उसकी कीमत का आकलन किए बगैर निवेश कर दिया।

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