मुजफ्फरपुर, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद स्थानीय दैनिक अखबारों में शराब दुकानों में बहाली के लिए प्रकाशित कराए गए विज्ञापनों को लेकर शुक्रवार को मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं अन्य के खिलाफ एक परिवादपत्र दायर किया गया।
अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा द्वारा दायर परिवादपत्र में आरोप लगाया गया है कि एक ओर जहां बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई है, वहीं सात अप्रैल को बिहार स्टेट बिवरेजेज कर्पोरेशन की ओर से कई स्थानीय अखबारों में शराब दुकानों में नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया गया है।
विज्ञापन में शराब दुकानों के लिए प्रबंधक, लेखापाल व कर्मी की नियुक्ति का उल्लेख किया गया है।
परिवादपत्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव क़े क़े पाठक, मद्य निषेध मंत्री अब्दुल जलील मस्तान एवं कुछ अन्य अज्ञात लोगों को इसके लिए जिम्मेदार बताया गया है।
ओझा ने पत्र में मुख्यमंत्री सहित अन्य पर जनता के साथ धोखाधड़ी एवं विश्वासघात का करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि इससे जनता के लाखों रुपये को नुकसान उठाना पड़ा है।
ओझा ने बताया कि अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए 18 अप्रैल का समय तय किया है।
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