नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। केन्द्रीय कृषि एवं कल्याण मंत्री ने शुक्रवार को इंदौर में शुरू हुए तीन दिवसीय वैश्विक बांस सम्मेलन में कहा कि बांस की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग है, इसलिए सरकार इसकी आपूर्ति और मांग की कमी को पाटने और विभिन्न उद्योगों में इसकी संभावना तलाशने और आपूर्ति सुनिश्चत करने के लिए काम कर रही है।
यहां जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक सम्मेलन में उन्होंने कहा कि 2015 के अंत तक वैश्विक बांस मंडी में 20 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जबकि इसी अवधि के अंत तक घरेलू बांस उद्योगों ने 26 हजार करोड़ रुपये का व्यापार किया।
मंत्री ने कहा कि औद्योगिक उपयोगों की तेजी से खोज की जा रही है। जैव ईंधन, बायो मास गैसीफीकेशन के रूप में सीधे ही उपयोग करके विद्युत सृजन के लिए बांस पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जा रहा है, ताकि चारकोल का उत्पादन किया जा सके अथवा कम्प्रेस्ट बैंबू बायोमास पैलेट तैयार किया जा सके। बांस से बाथरोब, बेबी वियरए टी.शर्ट मोजे, जैकेट और सूट जैसे वस्त्रों के उत्पादन और निर्यात के लिए संयंत्र स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि बांस का खाद्य पदार्थ, पोषाहारीय और आजीविका व्यवस्था संबंधी पारिस्थितिकीय सुरक्षा में अहम स्थान है। स्थायी और नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन के रूप में बांस सतत विकास, रोजगार सृजन, ग्रामीण निर्धन वर्ग को सतत आजीविका प्रदान करने और गरीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। हमारे देश में कुल वन क्षेत्र में लगभग 13 प्रतिशत बांस वन हैं और इसकी 137 से भी अधिक प्रजातियां उगाई जाती हैं, जिसके लगभग 1500 उपयोग हैं।
मंत्री ने कहा कि बांस वन क्षेत्रों में कमी आयी है। देश में बांस की उत्पादकता काफी कम है। इस कारण औद्योगिक उपयोग के लिए बांस की मांग और आपूर्ति में भारी अंतर है। योजना आयोग के अनुमानों के अनुसार घरेलू उत्पाद, मांग के आधे की आपूर्ति के लिए ही पर्याप्त है। अत: बांस आधारित परम्परागत उद्योग, बांस कम्पोजिट उद्योगों और समाज के अन्य वर्गों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बांस की गुणवत्ता और उत्पादन के सुधार की तत्काल आवश्यकता है।
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