लखनऊ, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली शानदार सफलता के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उत्तर प्रदेश में भी महागठबंधन का फार्मूला चलाने की कवायद शुरू की थी। अब उन पर राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का दबाव है कि जयंत सिंह को मुख्यमंत्री प्रत्याशी बनाए जाने पर वह हामी भर दें।
लखनऊ, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली शानदार सफलता के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उत्तर प्रदेश में भी महागठबंधन का फार्मूला चलाने की कवायद शुरू की थी। अब उन पर राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का दबाव है कि जयंत सिंह को मुख्यमंत्री प्रत्याशी बनाए जाने पर वह हामी भर दें।
उप्र में रालोद और जनता दल (युनाइटेड) के विलय को लेकर मंथन चल रहा है। दोनों पार्टियां विलय के बाद सियासी नफे-नुकसान का आकलन करने में जुटी हुई हैं।
सूत्रों की मानें तो रालोद नीतीश कुमार पर पार्टी नेता जयंत सिंह को बतौर भावी मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने का दबाव बनाने में लगी हुई है।
बिहार में मिली सफलता के बाद उप्र में रालोद के साथ गठबंधन की जोर-आजमाइश की शुरुआत नीतीश कुमार ने कही थी। तय हुआ था कि उप्र विधानसभा चुनाव से पहले रालोद का जद (यू) में विलय हो जाएगा। लेकिन अब रालोद की शर्तो ने नीतीश की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
सूत्र बताते हैं कि रालोद ने नीतीश के सामने तीन शर्ते रखी हैं। पहली शर्त : विलय के बाद जो नई पार्टी बनेगी, उसका राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह को बनाया जाए।
दूसरी शर्त : रालोद के राष्ट्रीय महासचिव जयंत सिंह को विधानसभा चुनाव में बतौर भावी मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट किया जाए।
तीसरी शर्त : विलय के बाद चौधरी अजित सिंह को राज्यसभा में भेजने का इंतजाम किया जाए।
रालोद की ओर से कहा गया है कि इन तीनों मांगों पर बात बनने के बाद ही उप्र में रालोद और जद (यू) के गठबंधन या विलय की संभावना बन सकती है।
रालोद के एक पदाधिकारी ने बताया कि रालोद की ये तीन शर्ते ही विलय का आधार बनेंगी। आने वाले दो पखवाड़े के भीतर इस पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा, ताकि 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर पार्टी अपनी तैयारियां शुरू कर सकें।
पदाधिकारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “उप्र में जद (यू) का कोई जनाधार नहीं है। हमारे जनाधार के बूते ही वह मोदी के सामने खड़े होने की कवायद कर रहा है। हमारी पार्टी और हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष के हितों को ध्यान में रखते हुए ही ये शर्ते रखी गई हैं।”
रालोद के पदाधिकारी ने हालांकि यह भी कहा कि यदि इन शर्तो पर नीतीश कुमार के साथ बात नहीं बनेगी तो पार्टी विधानसभा चुनाव में एक बार फिर भाजपा के साथ गठबंधन कर चुनाव में उतर सकती है। यह पार्टी के लिए अंतिम विकल्प होगा।
रालोद का पहले कांग्रेस से दोस्ती रही, फिलहाल जद (यू) के साथ मोल-भाव चल रहा और बात नहीं बनी तो भाजपा से भी गठजोड़ कर सकती है। मतलब साफ है, सत्ता के लिए रालोद को किसी भी विचारधारा या सिद्धांत से परहेज नहीं है।
रालोद के महासचिव डॉ. मसूद अहदम ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, “हां ऐसा संभव है।”
उन्होंने कहा, “यह तो वाजिब डिमांड है। हम चाहते हैं कि विलय के बाद अजित सिंह को नई पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए और पार्टी के युवा चेहरे जयंत सिंह को उप्र का मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाए। यदि ऐसा न हुआ तो पार्टी भाजपा के साथ गठबंधन के बारे में भी सोच सकती है।”
गौरतलब है कि उप्र में वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव होना है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की विरासत संभाल रहे रालोद का वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पूरी तरह सफाया हो गया था, इसलिए पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और अपने अरमानों को पंख लगाने के लिए जद (यू) अध्यक्ष नीतीश पर दबाव बना रही है।
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