लखनऊ, 22 अप्रैल (आईएएनएस/आईपीएन)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार (23 अप्रैल) को एक अनूठा सर्वे होने जा रहा है। प्रदेश के राज्य सूचना आयोग में वर्तमान कार्यरत मुख्य सूचना आयुक्त और 9 सूचना आयुक्तों में से सबसे खराब कार्य करने वाले सूचना आयुक्त का पता लगाने के लिए एक सामाजिक संस्था द्वारा सर्वे कराया जा रहा है।
लखनऊ, 22 अप्रैल (आईएएनएस/आईपीएन)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार (23 अप्रैल) को एक अनूठा सर्वे होने जा रहा है। प्रदेश के राज्य सूचना आयोग में वर्तमान कार्यरत मुख्य सूचना आयुक्त और 9 सूचना आयुक्तों में से सबसे खराब कार्य करने वाले सूचना आयुक्त का पता लगाने के लिए एक सामाजिक संस्था द्वारा सर्वे कराया जा रहा है।
राजधानी के हजरतगंज जीपीओ स्थित महात्मा गांधी पार्क में शनिवार को 11 बजे पूर्वाह्न् से 4 बजे अपराह्न् तक किया जाएगा।
यूपी में बीते 15 वर्षो से पारदर्शिता संवर्धन और जवाबदेही निर्धारण के क्षेत्र में कार्य कर रही सामाजिक संस्था येश्वर्याज सेवा संस्थान इसी दिन एक और सर्वे कराकर आरटीआई एक्ट को प्रभावी रूप से लागू करने के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा का पता लगाने के लिए भी सर्वे करा रही है।
कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि इस दिन एक आरटीआई जनजागरूकता कैंप का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उपस्थित आरटीआई एक्सपर्ट कैंप में आने वाले आम जन को आरटीआई एक्ट के प्रयोग में आ रही दिक्कतों के व्यावहारिक समाधान सुझाएंगे।
कार्यक्रम में नई दिल्ली की सामाजिक संस्था कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई) के सौजन्य से आरटीआई मार्गदर्शिका का नि:शुल्क वितरण भी किया जाएगा।
कार्यक्रम की आयोजिका सामाजिक कार्यकत्री और येश्वर्याज की सचिव उर्वशी शर्मा ने बताया कि उनकी संस्था के स्वयंसेवी इस सर्वे के लिए आम जनता और कैंप में आए लोगों से एक फॉर्म भरवाकर उनकी राय लेंगे।
उर्वशी ने बताया कि विगत कुछ वर्षो में उत्तर प्रदेश के सूचना आयुक्तों द्वारा सुनवाइयों के दौरान आरटीआई प्रयोगकर्ताओं के उत्पीड़न की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है और वर्तमान सूचना आयुक्तों में से कुछ आयुक्तों के द्वारा अपने पद ग्रहण के समय ली गई शपथ के प्रतिकूल जाकर पारदर्शिता विरोधी माइंडसेट के तहत आरटीआई एक्ट को कमजोर करने वाले कृत्य किए जा रहे हैं।
उर्वशी का कहना है कि सूचना आयुक्तों का इस प्रकार का व्यवहार किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और ऐसे आयुक्तों को पद पर बने रहने का कोई भी विधिक और नैतिक अधिकार नहीं है।
उर्वशी ने बताया कि इस सर्वे के आधार पर उत्तर प्रदेश के वर्तमान कार्यरत मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी और 9 सूचना आयुक्तों अरविंद सिंह बिष्ट, गजेंद्र यादव, खदीजतुल कुबरा, पारसनाथ गुप्ता, हाफिज उस्मान, राजकेश्वर सिंह, विजय शंकर शर्मा, स्वदेश कुमार और हैदर अब्बास रिजवी में से सबसे निकृष्ट का चयन करके उसे पदच्युत करने के लिए पहले यूपी के राज्यपाल से गुहार लगाई जाएगी और यदि आवश्यक हुआ तो उच्च न्यायालय में पीआईएल भी दायर की जाएगी।
उर्वशी ने बताया कि क्योंकि यूपी के समाजसेवी उनकी अगुआई में बीते 11 अप्रैल को ‘आरटीआई भवन’ के मुख्यद्वार के सामने मुख्य सूचना आयुक्त और सभी 9 सूचना आयुक्तों का पुतला दहन कर सूचना आयुक्तों के प्रति अपना रोष जाहिर कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि उनके संगठन द्वारा यह खुला सर्वे पारदर्शी रीति से कराया जा रहा है और इस सर्वे कार्य की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उनके संगठन ने यूपी के राज्यपाल, प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रमुख सचिव, मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी और सूचना आयोग के सचिव को पत्र लिखकर इस सर्वे कार्य के पर्यवेक्षण के लिए अपने प्रतिनिधियों को भेजने का आग्रह भी किया है।
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