‘जैन साधु-संतों को मिले खुले में शौच की छूट’

यहां के वर्णी नगर मड़ावरा में रविवार को हुई संगठन की बैठक में पदाधिकारियों ने जैन साधु-संतों को खुले स्थान पर शौच करने की छूट देने की मांग की। इस मांग को लेकर भारत के प्रधानमंत्री व उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर इससे संबंधित विधेयक संसद या विधानसभा में पारित न होने देने की मांग की।

दिगंबर जैन सोशल ग्रुप इकाई के अध्यक्ष डॉ. राकेश जैन सिंघई ने कहा कि केंद्र सरकार ने जोर-शोर से स्वच्छ भारत अभियान चलाया है, जो स्वागत योग्य है। लेकिन ज्ञात हुआ है कि भारत सरकार खुले में शौच एवं गंदगी करने को ‘लघु अपराध’ घोषित करने जा रही है। ऐसे में जैन साधु-संतों को जेल जाना पड़ सकता है, यह चिंता का विषय है।

वहीं, वरिष्ठ प्रवक्ता रमेश चंद्र जैन ने कहा कि पता चला है कि केंद्र सरकार स्वच्छ भारत अभियान को कानूनी जामा पहनाने के लिए संसद में एक विधेयक लाकर खुले में शौच करने, कचरा फेंकने, सार्वजनिक स्थानों को गंदा करने और प्लास्टिक की थैलियां जहां-तहां फेंकने को लघु अपराध घोषित करने जा रही है।

संगठन के सचिव धर्मेद्र सर्राफ ने कहा कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर इस कानून को प्रभावी बनाने की दिशा में प्रयास रत हैं। उन्हें जैन साधु-संतों को खुले में शौच करने की छूट देनी चाहिए।

प्रचार मंत्री पुष्पेंद्र जैन ने कहा कि जैन धर्म के आचरण ग्रंथों में विहित निर्देशों के अनुरूप दिगंबर जैन परंपरा के साधक आचार्य, उपाध्याय, मुनि, आर्यिका, ऐलक, क्षुल्लक आदि अहिंसा व्रत के परिपालन के लिए खुले स्थान में सदा से ही शौचक्रिया करते रहे हैं। इसलिए केंद्र सरकार कानून बनाने का प्रस्ताव वापस ले।

संगठन के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक को ज्ञापन भेजकर प्रस्तावित कानून वापस लेने की मांग की है।

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