नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय सोमवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश की उस याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया, जिसमें उन्होंने आधार कानून को धन विधेयक के रूप में पेश करने के सरकार के कदम को चुनौती दी है। शीर्ष अदालत ने महान्यायवादी मुकुल रोहतगी से अदालत को मामले से अवगत कराने के लिए कहा है।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस. ठाकुर, न्यायमूर्ति आर. भानुमति व न्यायमूर्ति उदय रमेश ललित की पीठ ने रोहतगी को इस मामले से अदालत को अवगत कराने के लिए कहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने शीर्ष अदालत को बताया कि प्रस्तावित आधार एक्ट को धन विधेयक के रूप में पेश करना असंवैधानिक है।
इस मामले में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक जनहित याचिका दाखिल की है। जयराम की ओर से मामले को अदालत में रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री चिदंबरम ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि कुछ विधेयक, वित्त विधेयक कहलाते हैं लेकिन बहुत कम विधेयक ही धन विधेयक बनने योग्य होते हैं।
चिदंबरम ने कहा कि सरकार आधार विधेयक को एक सदन (लोकसभा) में पारित कराने के बाद इसे दूसरे सदन (राज्यसभा) में धन विधेयक के रूप में पारित कराए और यही असंवैधानिक है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि चिदंबरम पूर्व वित्त मंत्री होने के चलते अदालत को इस मामले से ज्यादा बेहतर तरीके से अवगत कराएंगे, इसलिए मामले की सुनवाई उस वक्त होनी चाहिए, जब वह भी उपस्थित हों। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 मई का दिन तय किया है।
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