यहां प्लाइवुड बनाने के लिए लकड़ी से पत्तों की छिलाई का कार्य किया जाता है। सुबह लगभग साढ़े तीन बजे आग लकड़ी के इन पत्तों के छोटे टुकड़ों के ढेर में लगी थी। मौके पर मौजूद चौकीदारों ने वहां लगी मोटर को चालू कर आग पर काबू पाने का प्रयास किया और इसकी सूचना मालिक गोपाल खेतान को दी।
लगभग पांच बजे करनैलगंज में मौजूद फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुट गई। गाड़ी में पानी खत्म होने पर पास में मौजूद एक पंपिंग सेट को चालू करके उससे पानी लिया जाता रहा। आग बुझते न देखकर गोंडा से फायर ब्रिगेड की एक अन्य गाड़ी भी मंगाई गई।
दोनों से आग बुझाने का प्रयास होता रहा। इससे आग अन्यत्र नहीं फैलने पायी लेकिन बुझ भी नहीं सकी। पत्तों के टुकड़ों पर पानी पड़ते ही वह फैल जाता था तथा अंदर आग सुलगती रहती थी। आखिर में जेसीबी मंगवाकर उससे पत्तों को हटवाकर जब पानी डाला जाने लगा तो आग बुझने लगी।
दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे किसी अन्य स्थान पर आग लग जाने के कारण फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी वहां भेज दी गई, जबकि दूसरे से आग बुझाने का काम जारी रहा। इस दौरान कोतवाल अभय प्रताप मल्ल और वरिष्ठ उपनिरीक्षक आलोक दूबे सहित तमाम पुलिसकर्मी मौजूद रहे।
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