नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में इस्पात उद्योग की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। यह बात गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में कही।
जेटली ने कहा, “एनपीए में सबसे बड़ी हिस्सेदारी इस्पात उद्योग की है। यदि हमारी कंपनियां अपने इस्पात नहीं बेच पाएंगी, तो स्वाभाविक है कि वे बैंकों के ऋण और उस पर लगने वाले ब्याज का भुगतान नहीं कर पाएंगी।”
उन्होंने कहा कि चीन के इस्पात की भारत में डंपिंग के कारण भारतीय इस्पात उद्योग में सुस्ती आई है और इसके कारण बैंकों का खाता भी प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा, “वैश्विक चुनौती के कारण जब कुछ उद्योग में सुस्ती रहती है, तो सिर्फ उन उद्योगों में ही सुस्ती नहीं रहती, बल्कि इससे बैंकों का बायलेंस शीट भी प्रभावित होता है। इसे दोहरी बायलेंस शीट समस्या कहते हैं।”
मंत्री ने कहा कि कुछ बुरे हो चुके ऋण संभव है कि गलत आधार पर दिए गए हों, ऐसे मामलों की जांच होगी।
उन्होंने कहा कि एनपीए का मुद्दा तभी सुलझ सकता है, जब बुरे ऋण को सही तरीके से बायलेंस शीट में दिखाया जाए और छुपाया नहीं जाए।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने मंगलवार को संसद में कहा था कि सरकारी बैंकों के सबसे बड़े 50 डिफाउल्टरों पर 1.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक बकाया है।
जेटली ने कहा, “हम ऐसे कानून बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे बैंक बढ़ते एनपीए से निपट सकें। दिवालिया विधेयक संसद में पेश किया जा चुका है।”
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