बिंदी यादव : साइकिल चोर से बना धनी व्यापारी

पटना, 13 मई (आईएएनएस)। बिहार के गया में रोडरेज के दौरान 19 वर्षीय आदित्य सचदेवा की गोली मारकर हत्या करने वाले रॉकी यादव के पिता बिंदेश्वरी प्रसाद यादव उर्फ बिंदी यादव आज धनाढ्य व्यापारी, राजनीतिक रसूख वाला व्यक्ति है।

पटना, 13 मई (आईएएनएस)। बिहार के गया में रोडरेज के दौरान 19 वर्षीय आदित्य सचदेवा की गोली मारकर हत्या करने वाले रॉकी यादव के पिता बिंदेश्वरी प्रसाद यादव उर्फ बिंदी यादव आज धनाढ्य व्यापारी, राजनीतिक रसूख वाला व्यक्ति है।

बिंदी यादव गिरफ्तार हो चुका है और उनकी पत्नी विधान पार्षद (एमएलसी) मनोरमा देवी के खिलाफ वारंट जारी हो चुका है, पुलिस तलाश रही है।

एक ऐसा भी समय था, जब 1980 के दशक में बिंदी एक छुटभैया अपराधी था। स्थानीय लोगों का कहना है, “साइकिल चुराने के आरोप में वह पकड़ा भी गया था।” बिहार के गया शहर की अपराध की दुनिया में वह छोटा खिलाड़ी था।

लेकिन जरायम की दुनिया में बड़ा बनने की उसकी तमन्ना थी, इसलिए बिंदी ने 1990 के दशक में दूसरे गुंडे बच्चुआ से हाथ मिलाया और तीन साल तक गया शहर में कई आपराधिक घटनाओं में संलिप्त रहा।

स्थानीय स्तर पर वह बिंदी-बच्चुआ के नाम से मशहूर था और अपनी राह में आने वाले किसी को भी नहीं बख्शा।

गया शहर की प्रमुख संपत्तियों को हथियाने के बाद बिंदी की काफी बदनामी हुई। उसकी की बंदूकें चलती रहीं और क्षेत्र के लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हुए।

उस समय सत्ता की कमान लालू यादव के हाथों में थी। सुरेंद्र यादव, राजेंद्र यादव और महेश्वर यादव जैसे खतरनाक अपराधियों के बल पर बिहार में अपराध फल-फूल रहा था। बिंदी और बच्चुआ भी इस दल में शामिल हो गया।

इन लोगों के क्रूर तरीकों से सरकार को कड़े मिजाज वाले जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को गया शहर में पदस्थापित करना पड़ा।

बिंदी और बच्चुआ से निपटने के लिए प्रशासन को अपराध नियंत्रण के कड़े कानून लागू करने पड़े।

यही समय था, जब बिंदी को महसूस हुआ कि राजनीतिक समर्थन के बिना वह जीवित नहीं रह सकता। वर्ष 1990 के दशक में वह लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में शामिल हो गया। यहीं से उसका अपराधी से राजनेता बनने का सफर शुरू हुआ।

राजद के समर्थन से 2001 में बिंदी गया जिला परिषद का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया। इस पद पर वह 2006 तक रहा।

इस बीच 2005 में विधानसभा के चुनाव में जब राजद से टिकट नहीं मिला तो उसने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन हार गया।

बिंदी यादव राज्य में 2010 का विधानसभा चुनाव राजद के टिकट पर लड़ा और नामांकन के समय हलफनामा देकर अपने उपर 18 आपराधिक मामले होने की घोषणा की। लालू यादव ने उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि को नजरअंदाज किया, लेकिन यह काम नहीं आया।

वर्ष 2010 में नीतीश कुमार के शासन में आने के बाद बिंदी ने अपनी निष्ठा बदल दी और जनता दल (युनाइटेड) में शामिल हो गया। लेकिन अपनी छवि के प्रति सजग नीतीश कुमार एक अपराधी का समर्थन करने के पक्ष में नहीं थे।

वर्ष 2011 में जब बिंदी की गिरफ्तारी हुई तो उसके कब्जे से एक एके-47 राइफल और चार हजार कारतूस मिले थे। फिर भी, जद(यू) और राजद के सान्निध्य का उसे भरपूर लाभ मिला।

माना जाता है कि बिंदी के नक्सलियों से अच्छे संबंध हैं और इसलिए उपद्रवग्रस्त गया क्षेत्र के कई सरकारी ठेके उसे ही मिले। इस तरह वह एक छोटे अपराधी से पैसों से खेलने वाला धनी व्यापारी बन गया।

प्रतीत होता है कि बिहार की सरकारों ने बिंदी की आपराधिक पृष्ठभूमि को नजरअंदाज किया। आज भी उसके खिलाफ हत्या और अपहरण समेत 11 आपराधिक मामले चल रहे हैं।

आज बिंदी के पास गया, बोधगया, दिल्ली और उसके आसपास के इलाके में मॉल, होटलें और 15 पेट्रोल पंप हैं। सड़क निर्माण और शराब के काराबार तक विभिन्न क्षेत्रों से उसके व्यापारिक हित जुड़े हुए हैं। इसलिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि असका बेटा रॉकी 1.5 करोड़ रुपये कीमत का एसयूवी चला रहा था और .32 बोर की पिस्तौल अपनी जेब रखता था, जिससे उसने आदित्य की हत्या कर दी।

बिंदी का खुद का राजनीतिक करियर भले ही खराब रहा, लेकिन वह 2015 में अपनी पत्नी को विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) बनाने सफल रहा।

बिंदी के बुरे दिन हालांकि अब शुरू हो चुके हैं। बेटे को भगाने की व्यवस्था करने के जुर्म में वह गिरफ्तार किया जा चुका है।

राज्य में शराबबंदी के बावजूद उसके घर से शराब की बोतलें बरामद होने के बाद उसकी पत्नी मनोरमा देवी को जद(यू) से निलंबित कर दिया गया है।

बिंदी यादव परिवार की करतूतों से लोगों में जहां आक्रोश है, वहीं राज्य में राजनीतिक बवाल मचा हुआ है। अब देखना है कि सुशासन का दावा करने वाली नीतीश सरकार आगे क्या कार्रवाई करती है और अदालत इस परिवार को सजा के किस मुकाम तक पहुंचाती है।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493