नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को एक नई राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) नीति को मंजूरी दे दी। इसे सृजनात्मक कार्यो जैसे संगीत, किताबें, औद्योगिक ड्राइंग, सॉफ्टवेयर, दवाओं की खोज आदि से जुड़े व्यावसायिक हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है।
आईटी उद्योग का संगठन नैसकॉम ने इस नीति का स्वागत किया है।
देश इस प्रक्रिया में नवाचार की रक्षा की दिशा में वैश्विक दायित्व को पूरा करना चाहता है। इस नीति के मूल में औद्योगिक प्रगति को रखा गया है। नई नीति कानून और संस्थागत तंत्र के बीच सहयोग सुनिश्चित करने के लिए एक दूरदर्शी दस्तावेज के रूप में काम आएगी।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंत्रिमंडल द्वारा इस नीति को मंजूरी देने के एक दिन बाद शुक्रवार को कहा, “जब हम नए आविष्कार कर रहे हैं, जब यहां वाणिज्य, उद्योग और कारोबार में वृद्धि हो रही है, तो उनके बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण की व्यवस्था होनी ही चाहिए।”
जेटली ने कहा, “हमारे पास एक मजबूत ट्रेडमार्क कानून है जो उत्पादों की वाणिज्यिक पहचान सुनिश्चित करता है। इसका मूल सिद्धांत यह है कि व्यक्ति को अपनी पहचान और नाम के साथ उत्पाद बेचना चाहिए। किसी की पहचान चुराना संभव नहीं होना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “अगर आप किसी की पहचान चुराकर उसकी पीठ पर सवारी करते हैं तो इसे वाणिज्यिक चोरी कहा जाता है।” जेटली ने जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा, “हमें इसकी जरूरत है ताकि दवाओं की लागत प्रभावित न हो। पेटेंट एकाधिकार की स्थिति को जन्म दे सकते हैं। इसलिए एक संतुलन साधने की जरूरत है।”
उन्होंने कहा कि पहले कॉपीराइट कानून किताबों और प्रकाशन तक ही सीमित था। अब सुधार के बाद यह फिल्म, संगीत और औद्योगिक ड्राइंग में भी लागू होगा। साथ ही कई कानूनों को सुव्यवस्थित किया जा रहा है जो सेमी कंडक्टर्स, डिजाइन्स, ज्योग्राफिकल इंडीकेशन्स, ट्रेडमार्क और पेटेंट पर लागू होंगे।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि बौद्धिक संपदा संरक्षण पर मजबूत नीति व्यापार से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार समझौते के तहत विश्व व्यापार संगठन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का सूचक है। साथ ही नई बौद्धिक संपदा अधिकार नीति इतनी लचीली भी है कि वह देश की विकास की चिंताओं का संरक्षण कर सके।
बयान में कहा गया है कि नई नीति औद्योगिक नीति संवर्धन विभाग द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समूह की सिफारिशों के आधार पर बनाई गई है, जिसे सचिवों के एक समूह ने दोबारा जांचा-परखा है।
जेटली ने कहा कि आज के बाद इस नीति की निगरानी और देखरेख औद्योगिक नीति संवर्धन विभाग द्वारा की जाएगी, न कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा।
उन्होंने कहा, “नई आईपीआर नीति के सात बुनियादी उद्देश्य हैं। इसमें पर्याप्त जागरूकता पैदा करना, प्रशासन, प्रवर्तन और आईपीआर कानूनों के तहत न्यायिक निर्णय शामिल हैं।”
जेटली ने कहा कि नई नीति के 2017 से लागू होने के बाद किसी ट्रेडमार्क के पंजीकरण में महज एक महीने लगेगा।
जेटली ने कहा कि दवाओं की कीमतों को काबू में रखने के लिए ‘स्वास्थ्य संबंधी विचारों के साथ पेंटेट कानूनों का संतुलन’ बनाना जरूरी है। कई देशों में दवाओं की कीमतें अधिक हैं। जीवनरक्षक दवाओं को वाजिब कीमत पर आम नागरिकों की पहुंच में होना चाहिए।
जेटली ने कहा, “इस नीति का उद्देश्य समाज के सभी वर्गो में इसके आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक लाभ के बारे में जागरूकता पैदा करना है।”
उन्होंने कहा कि इस कदम से भारत में बौद्धिक संपदा के लिए भावी रोडमैप तैयार करने में सहायता होगी। इस नीति से भारत में रचनात्मक और अभिनव ऊर्जा के भंडार को प्रोत्साहन मिलेगा तथा सबके बेहतर और उज्जवल भविष्य के लिए इस ऊर्जा का आदर्श इस्तेमाल संभव होगा।
भारत की आईपीआर नीति पर अमेरिकी चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर जेटली ने कहा, “एकाधिकार से वही प्यार करते हैं जो उस पर हक रखते हैं। लेकिन, किसी भी देश को अपने हित के बारे में चिंतित होने का अधिकार है।”
विधि फर्म आनंद एंड आनंद के विशेषज्ञ प्रवीण आनंद ने कहा कि वह बौद्धिक संपदा संरक्षण के मामले में देश की नीतियों में बीते दो साल में हुए बदलावों को देखकर बहुत खुश हैं।
राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति के मुख्य बिन्दु :
विजन घोषणा – भारत में सबके लाभ के लिए बौद्धिक संपदा को रचनात्मक और अभिनव आधार मिलता है। भारत में बौद्धिक संपदा से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला, संस्कृति, पारम्परिक ज्ञान और जैव विविधता संसाधनों को प्रोत्साहन मिलता है। भारत में विकास के लिए ज्ञान मुख्य कारक है।
मिशन घोषणा – भारत में शक्तिशाली, जीवंत और संतुलित बौद्धिक संपदा अधिकार प्रणाली से रचनात्मकता और नवाचार को सहायता मिलती है, उद्यमशीलता को प्रोत्साहन मिलता है तथा सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा मिलता है। इसके जरिए स्वास्थ्य सुविधा, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षा को बढ़ाने में मदद मिलती है। अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी महत्व भी इससे जुड़े हुए हैं।
इस नीति के निम्नलिखित सात लक्ष्य हैं –
1. बौद्धिक संपदा अधिकार जागरूकता : पहुंच और प्रोत्साहन – समाज के सभी वर्गो में बौद्धिक संपदा अधिकारों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक लाभों के प्रति जागरूकता पैदा करना।
2. बौद्धिक संपदा अधिकारों का सृजन : बौद्धिक संपदा अधिकारों के सृजन को बढ़ावा।
3. वैधानिक एवं विधायी ढांचा : मजबूत और प्रभावशाली बौद्धिक संपदा अधिकार नियमों को अपनाना, ताकि अधिकृत व्यक्तियों तथा बृहद लोकहित के बीच संतुलन कायम हो सके।
4. प्रशासन एवं प्रबंधन : सेवा आधारित बौद्धिक संपदा अधिकार प्रशासन को आधुनिक और मजबूत बनाना।
5. बौद्धिक संपदा अधिकारों का व्यवसायीकरण : व्यवसायीकरण के जरिए बौद्धिक संपदा अधिकारों का मूल्य निर्धारण।
6. प्रवर्तन एवं न्यायाधिकरण : बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघनों का मुकाबला करने के लिए प्रवर्तन एवं न्यायिक प्रणालियों को मजबूत बनाना।
7. मानव संसाधन विकास : मानव संसाधनों, संस्थानों की शिक्षण, प्रशिक्षण, अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत बनाना तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों में कौशल निर्माण करना।
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