नई दिल्ली, 17 मई (आईएएनएस)। दिल्ली नगर निगम के 13 वार्डो के लिए हुए उपचुनाव के नतीजों से मंगलवार को तीनों निगमों पर राज कर रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी 13 में से केवल तीन वार्डो पर जीत बरकरार रख पाई।
पहली बार निकाय चुनाव में उतरी आम आदमी पार्टी (आप) ने पांच वार्डो में जीत दर्ज की और कांग्रेस ने चार सीटें जीतकर अपनी स्थिति सुधारी है।
एक सीट स्वतंत्र उम्मीदवार राजेंद्र सिंह तंवर ने जीती, जो बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस नेता अजय माकन, दोनों ने परिणाम को अपने-अपने हक में बताया है।
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी में अपना विश्वास बरकरार रखा है। आप पिछले वर्ष फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में भारी जीत दर्ज कराकर सत्ता में आई थी।
केजरीवाल ने कहा कि नगर निगम में सिर्फ भाजपा और कांग्रेस की उपस्थिति रही है, लेकिन बाहरी आप ने सर्वाधिक सीटें जीती है।
उन्होंने अगले वर्ष उत्तर दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी), पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी), और दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) के लिए होने वाले चुनाव में भारी जीत दर्ज कराने का संकल्प लिया।
तीनों निकाय मिलकर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) बनते हैं, जो इस शहर की सबसे बड़ी नागरिक संस्था है।
कांग्रेस ने कहा कि उसके पारंपरिक मतदाता पार्टी की ओर लौटने शुरू हो गए हैं। पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई थी।
कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा, “सफाई कर्मचारी, रेहड़ी-पटरी वाले और झुग्गी-बस्ती के लोगों सहित कांग्रेस के परंपरागत मतदाता कांग्रेस की तरफ लौट रहे हैं।” उपचुनाव में कांग्रेस का मत प्रतिशत 24.7 रहा।
उन्होंने कहा, “इसके अलावा अल्पसंख्यक मतदाता भी कांग्रेस की ओर लौट रहे हैं।” माकन ने कहा कि भाजपा और आप के धनबल, बाहुबल और प्रशासनिक बल के बावजूद कांग्रेस ने चार सीटें जीती हैं।
लेकिन चुनाव परिणाम भाजपा के लिए परेशान करने वाले रहे, जिसका तीनों निगमों पर शासन है। भाजपा सिर्फ उन सात वार्डो में से मात्र दो पर जीत दर्ज करा पाई, जिनपर 2012 में उसने जीत दर्ज की थी। भाजपा की दो-दो सीटें कांग्रेस और आप के पास चली गईं और एक निर्दलीय के खाते में।
आप के विजेता उम्मीदवारों में मोहम्मद सादिक (बल्लीमारान), अशोक कुमार (विकास नगर), रमेश (मटियाला), अनिल मलिक (नानकपुरा) और अभिषेक बिधूड़ी (तहखंड) हैं।
जबकि भाजपा से महेंद्र नागपाल (वजीरपुर), भूपिंदर मोहन भंडारी (शालीमार बाग) और कृष्ण गहलोत (नवादा) विजयी हुए हैं।
कांग्रेस के विजेता उम्मीदवारों में अशोक भारद्वाज (कमरुद्दीन नगर), योगिता राठी (मुनिरका), आनंद कुमार (खिचड़ीपुर) और पंकज (झिलमिल) शामिल हैं।
भाटी वार्ड से स्वतंत्र उम्मीदवार राजेंद्र सिंह तंवर ने नतीजे आने के फौरन बाद घोषणा की कि वह कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं।
कांग्रेस और भाजपा दोनों ने कहा कि परिणाम बताते हैं कि राजधानी के लोग 2015 के विधानसभा चुनाव के बाद आप से दूर हो रहे हैं।
आप नेता सोमनाथ भारती ने हालांकि इस आरोप को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “हमने पहली बार निगम चुनाव लड़ा है। हमारे वरिष्ठ नेताओं ने प्रचार तक नहीं किया। फिर भी हमारे लिए निगम चुनाव में यह एक शानदार शुरुआत है।”
नगर निगम के 13 वार्डो के लिए 15 मई को मतदान हुआ था, जिसमें छह लाख से अधिक मतदाताओं में से 50 प्रतिशत से भी कम ने वोट दिए।
मंगलवार सुबह राज्य निर्वाचन आयोग ने नतीजों की घोषणा कर दी। इन चुनावों को अगले वर्ष के निकाय चुनावों के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा नेताओं ने हालांकि कहा कि उन्हें 34.11 प्रतिशत वोट मिला है। आप 29.93 प्रतिशत वोट पाकर दूसरे स्थान पर और कांग्रेस 24.87 प्रतिशत वोट के साथ तीसरे स्थान पर है।
दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि उनकी पार्टी परिणामों का विश्लेषण करेगी।
उन्होंने कहा, “इसके कई कारण रहे। गर्मी के कारण हमारे पारंपरिक मतदाता घरों से नहीं निकले। तमाम सारे स्कूलों की छुट्टी के कारण दिल्ली से बाहर हैं।”
2013 व 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए निगम सदस्यों द्वारा दिए गए इस्तीफे के बाद से दिल्ली में तीनों नगर निकायों के 13 वार्ड में सीटें रिक्त थीं।
13 नवनिर्वाचित निगम पार्षदों में से 12 बार पहली बार चुनाव में खड़े हुए थे।
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