शिमला, 18 मई (आईएएनएस)। फिल्म अभिनेता अनुपम खेर शिमला यात्रा के दौरान अपने अतीत में खो गए। उन्होंने कहा कि अपने पुराने दोस्तों से मिलकर वह अभिभूत हो गए थे। उन्होंने अपने पिता को बहुत याद किया, जिनका चार वर्ष पहले देहांत हो गया।
खेर ने संवाददाताओं से कहा, “मैं प्रत्येक वर्ष यहां आता हूं। यह मेरे घर जैसा है। मैं गहराई से इस शहर से जुड़ा हूं, जहां हर दूसरा व्यक्ति मुझे जानता है और मेरी उपलब्धियों के बारे में पूछता है।
वह यहां एक भारतीय कॉफी हाउस में नीना गुप्ता के साथ बैठे थे। अनुपम ने अनौपचारिक बातचीत में संवाददाताओं से कहा, “इस बार यह अलग है, क्योंकि मेरे पिता मेरे साथ नहीं है।”
उनके पिता पुष्कर नाथ कश्मीरी पंडित थे, जो 1949 में शिमला आकर बस गए थे। फरवरी 2012 में उनका निधन हो गया।
उन्होंने कहा, “मैंने अपने जीवन का 17 साल यहां बिताए हैं और मैं यहां के हर निवासी तथा दुकानदार से परिचित हूं।”
उन्होंने यहां के निवासियों का उन्हें आदर देने के लिए धन्यवाद किया।
अनुपम से जब कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “कश्मीरी पंडित हमेशा से अपनी अनूठी सांस्कृतिक पहचान और ज्ञान के लिए जाने जाते हैं, लेकिन आज अपने ही देश में वे शरणार्थियों जैसी जिंदगी जी रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि जब तक कश्मीरी पंडितों को न्याय नहीं मिलेगा, वह इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।
उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
अनुपम और नीना यहां ‘मेरा वो मतलब नही था’ नाटक के लिए आए थे, जिसका निर्देशन राकेश बेदी ने किया। इसका मंचन ऐतिहासिक गैती थियेटर में किया।
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