नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय गुरुवार को इटली सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उसने अपने नौसैनिक सार्जेट मेजर सेल्वाटोर गिरोन की जमानत शर्तो में ढील देने की मांग की है, ताकि वह स्वदेश लौट सके।
गिरोन भारत में रोके गए इटली के उन दो नाविकों में से एक हैं, जिन पर 2012 में केरल तट से दूर दो भारतीय मछुआरों की हत्या का आरोप है।
चीफ मास्टर सार्जेट मासीमिलियानो लैटोर और सार्जेट मेजर सेल्वाटोर गिरोन उस समय सुरक्षा कर्मी के रूप में इटली के तेल टैंकर एम.टी. एनरिका लेक्सी पर तैनात थे और टैंकर हिंदमहासागर पर कर रहा था।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद द्वारा इटली सरकार की याचिका का समर्थन किए जाने पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी. पंत और न्यायमूíत डी.वाई. चंद्रचूड़ की अवकाश पीठ इस पर सुनवाई के लिए तैयार हो गई।
इटली सरकार ने गिरोन की जमानत शर्तो में ढील की मांग की है, ताकि अदालत के अधिकार के तहत गिरोन स्वदेश लौट सके। अदालत में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने इटली सरकार के तर्को का समर्थन किया।
इटली की सरकार ने जमानत शर्तो में छूट इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (आईटीएलओएस) के 29 अप्रैल के उस आदेश को देखते हुए मांगी है, जिसमें भारत व इटली को जमानत शर्तो में ढील को लेकर सहयोग करने के लिए कहा गया है, ताकि गिरोन उसके समक्ष मध्यस्थता प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान अपने देश लौट सके।
अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने अपने 29 अप्रैल के फैसले में कहा, “मानवीय अवधारणा को प्रभावी बनाने के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही समेत सर्जेट गिरोन की जमानत शर्तो में ढील के लिए इटली और भारत सहयोग करेगा, ताकि पंचाट में लंबित निर्णय प्रक्रिया के दौरान वह भारत की शीर्ष अदालत के अधिकार के तहत स्वदेश लौट सके।”
न्यायाधिकरण ने यह भी कहा था कि अगर भारत गिरोन को रखना चाहता है तो उसे लैटाना इटली का दायित्व है, क्योंकि एनरिका लेक्सी घटना के मद्देनजर गिरोन भारत के अधिकार क्षेत्र में है।
लैटोर और गिरोन पर अधिकार क्षेत्र को लेकर इटली और भारत के बीच विवाद सुलझाने के लिए समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधिपत्र (यूएनसीएलओएस) की कंडिका छह के तहत अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण का गठन किया गया है।
इटली के नौसैनिकों पर मुकदमा चलाने के लिए अधिकार क्षेत्र को लेकर यूएनसीएलओएस के प्रावधानों के तहत अनिवार्य और बाध्यकारी मध्यस्थता कार्यवाही के लिए भारत और इटली संबद्ध हैं।
मध्यस्थता न्यायाधिकरण के 29 अप्रैल के फैसले को लागू कराने के लिए इटली ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
आईटीएलओएस के 24 अगस्त, 2015 के फैसले के बाद इस मामले में दोनों देशों में कार्यवाही पर रोक लगी हुई है।
इतालवी नौसैनिकों पर मुकदमा चलाने के लिए भारत और इटली के बीच अधिकार क्षेत्र तय करने के लिए आईटीएलओएस अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता कर रहा है।
भारतीय मछुआरों की हत्या के अन्य आरोपी इटली नाविक चीफ मास्टर सर्जेट मासीमिलियानो लैटोर खराब तबीयत व इलाज के आधार पर पहले से ही इटली में हैं।
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