भोपाल, 24 मई (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के बाघ विहीन हो चुके पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में बाघों को फिर से लाने के सफल प्रयोग के गुर सीखने कई और देशों के प्रतिनिधि यहां आ रहे हैं। बीते दिनों यहा वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) का नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आया। उसने यहां जाना कि उद्यान को बाघों से फिर से कैसे आबाद किया जा सकता है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, तीन दिनों तक यहां रहे इस अध्ययन दल का मकसद कंबोडिया, वियतनाम एवं थाईलैंड आदि देशों में बाघों को आबाद करना है। ये वे इलाके हैं, जहां बाघ विलुप्त हो गए हैं, कम हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं। पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की पहचान देश के दूसरे सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान की बन गई थी, क्योंकि यहां एक भी बाघ नहीं बचा था, लेकिन कान्हा और बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए बाघों के बाद यहां बाघों की संख्या 32 तक पहुंच गई।
पन्ना पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल ने बाघ पुर्नस्थापना के दौरान की जाने वाली गतिविधियों, मैदानी-स्तर पर होने वाली कठिनाइयों और तकनीकी जानकारी ली। प्रतिनिधिमंडल में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ग्रेटर मेकांग प्रोग्राम प्रमुख स्टुअर्ट चेपमेन, कंट्री डायरेक्टर (वियतनाम) वान गोक थिन्ह, कंट्री डायरेक्टर (कंबोडिया) सैम अथ छिथ, कंट्री डायरेक्टर (थाईलैंड) योवाकाक थियाराचोव, संरक्षक कार्यक्रम संचालक (कंबोडिया) मार्क जोसेफ, भारत के कार्यक्रम संचालक डॉ. सेजल वोराह, वरिष्ठ समन्वयक जिमी बोराह और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंटरनेशनल अलाइव इनीशिएटिव के वरिष्ठ सलाहकार जोसेफ वट्टाकावेन शामिल थे।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रतिनिधियों ने पावर प्रजेंटेशन देखी, दौरा किया एवं बाघ अनुश्रवण टीम के सदस्यों से चर्चा कर अनुभव साझा करने के साथ ही प्रशिक्षण भी लिया।
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