नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। भारत में रिहायशी रियल एस्टेट बाजार स्थिरीकरण की ओर बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2016 की पहली छमाही की तुलना में दूसरी छमाही में बिक्री एक प्रतिशत से अधिक घटी।
यह गिरावट वित्त वर्ष 2014 की दूसरी छमाही के बाद सबसे कम है।
वित्त वर्ष 2016 के लिए ऑनलाइन रियल एस्टेट सलाहकार ‘प्रोपटाइगर’ की ‘इंडिया रियल्टी रपट’ के मुताबिक, इस दौरान घरों के दाम भी एक सीमा में रहे। वित्त वर्ष 2016 की पहली छमाही की तुलना में दूसरी छमाही में मकानों के दामों में मामूली एक प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसके चलते वित्त वर्ष 2017 में घरों के दामों में गिरावट होने का जोखिम कम ही दिख रहा है।
रपट के अनुसार, बीते वर्ष की तुलना में वित्त वर्ष 2016 में रिहायशी इकाइयों की कुल बिक्री 33 प्रतिशत गिर गई। वित्त वर्ष 2015 में लगभग 315,000 इकाइयां बिकी थीं, जबकि वित्त वर्ष 2016 में 211,000 इकाइयां बिकीं।
किफायती घरों की श्रेणी (50 लाख से कम) का दबदबा कायम रहा। वित्त वर्ष 2016 में 50 फीसदी से अधिक घर बिकने के लिए तैयार हुए और इनकी बिक्री 52 प्रतिशत से अधिक हुई। वित्त वर्ष 2014 की तुलना में अपार्टमेंट की बिक्री औसतन तीन प्रतिशत कम हुई, जबकि विला इकाइयों की बिक्री 18 प्रतिशत कम हुई।
वित्त वर्ष 2016 में अपार्टमेंट्स की कुल बिक्री में 1-बीएचके अपार्टमेंट्स की कुल हिस्सेदारी 22 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 2015 में 21 प्रतिशत थी।
रपट में यह भी कहा गया है कि लक्जरी सेगमेंट (75 लाख रुपये से अधिक बजट) में बिक्री में काफी वृद्धि हुई। यह वित्तवर्ष 2015 की दूसरी छमाही में 24 प्रतिशत से बढ़कर वित्तवर्ष 2016 की दूसरी छमाही में 29 प्रतिशत हो गया।
इस रपट के बारे में अनुराग झंवर, बिजनेस हेड (कंसल्टिंग एवं डेटा इनसाइट्स), प्रोपटाइगर डॉट कॉम ने कहा, “रियल एस्टेट सेक्टर में हो रहे बदलाव भविष्य का संकेत करते हैं। उपभोक्ताओं की ओर केंद्र बढ़ रहा है।”
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