नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को हिंदुस्तान स्टील वर्क्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (एचएससीएल) के वित्तीय पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कैबिनेट ने राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम लिमिटेड (एनबीसीसी) द्वारा एचएससीएल का अधिग्रहण किए जाने को भी अपनी स्वीकृति दे दी है।
एनबीसीसी शहरी विकास मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है। एचएससीएल की मौजूदा चुकता इक्विटी पूंजी 117.1 करोड़ रुपये है। प्रस्ताव के तहत, भारत सरकार के गैर योजना ऋण एवं योजना ऋण के साथ-साथ उन पर संचित ब्याज और 1,502.2 करोड़ रुपये के बकाया गारंटी शुल्क को इक्विटी में परिवर्तित किया जाएगा और कंपनी की इक्विटी पूंजी को बढ़ाकर उसी स्तर पर पहुंचा दिया जाएगा।
कंपनी की चुकता इक्विटी पूंजी 1,619.3 करोड़ रुपये हो जाएगी। इसके एवज में 31 मार्च, 2015 तक के 1585 करोड़ रुपये के संचित घाटे को बट्टे खाते में डाल दिया जाएगा। संचित घाटे को बट्टे खाते में डाल देने के बाद एचएससीएल की इक्विटी और चुकता पूंजी 34.3 करोड़ रुपये हो जाएगी। एनबीसीसी 35.7 करोड़ रुपये की राशिएचएससीएल में इक्विटी के रूप में डालेगी। एचएससीएल इसके बाद एनबीसीसी की सहायक कंपनी बन जाएगी और इसमें एनबीसीसी की इक्विटी अंशभागिता 51 फीसदी होगी।
एचएससीएल में भारत सरकार की हिस्सेदारी घटकर 49 फीसदी रह जाएगी। एचएससीएल की इक्विटी और चुकता पूंजी 70 करोड़ रुपये हो जाएगी।
एनबीसीसी एवं एचएससीएल भारत सरकार के उद्यम हैं और उनकी कारोबारी गतिविधियां एक जैसी हैं। इस निर्णय से एनबीसीसी को अपना कारोबारी स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी और इसके साथ ही श्रमबल का बेहतर उपयोग करने में भी सहायता मिलेगी। एनबीसीसी और एचएससीएल एक-दूसरे के संसाधनों एवं विशेषज्ञता से लाभ उठाएंगी। एचएससीएल परियोजनाओं के साथ-साथ मिले आदेशों के निष्पादन की अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में सक्षम हो जाएगी।
भारत सरकार वाणिज्यिक बैंकों से लिए गए सावधि ऋणों को निपटाने के लिए 200 करोड़ रुपये की एकबारगी सहायता प्रदान करेगी। यह 110 करोड़ रुपये (लगभग) की आकस्मिक देनदारी का बोझ भी वहन करेगी, जैसा कि वीआरएस देनदारियों के लिए मुआवजे के मद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्णय लिया गया। इसके अलावा, भारत सरकार वित्त वर्ष 2015-16 के लिए बैंक ऋणों पर तकरीबन 44 करोड़ रुपये के बकाया ब्याज (31 मार्च 2016 तक) के साथ-साथ एनबीसीसी द्वारा एचएससीएल के अधिग्रहण की तारीख तक की ब्याज राशि का भी भुगतान करेगी।
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