नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। ई-वेस्ट उत्पादन के मामले में भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश बन गया है, जहां प्रत्येक साल 18.5 लाख मीट्रिक टन इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट पैदा होता है।
एसोचैम (एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) तथा कंसल्टेंसी कंपनी केपीएमजी ने एक संयुक्त अध्ययन में कहा कि प्रत्येक साल पैदा होने वाले 18.5 लाख मीट्रिक टन ई-वेस्ट में 12 फीसदी अकेले दूरसंचार के उपकरण होते हैं।
अध्ययन के मुताबिक, “प्रत्येक साल इस्तेमाल में आने वाले 100 करोड़ मोबाइल फोन में से 25 फीसदी सालाना तौर पर ई-वेस्ट में तब्दील हो जाते हैं।”
अध्ययन के मुताबिक, “भारत निश्चित तौर पर दूसरे सबसे बड़े मोबाइल फोन बाजार के तौर पर उभरा है, जहां कुल 1.03 अरब उपयोगकर्ता हैं। लेकिन साथ ही यह ई-वेस्ट उत्पन्न करने वाला दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश बन गया है, जहां प्रत्येक साल 18.5 लाख मीट्रिक टन ई-वेस्ट पैदा हो रहा है।”
एसोचैम नेशनल काउंसिल के अध्यक्ष पी.बालाजी ने अध्ययन जारी करते हुए कहा, “पिछले साल 10 करोड़ से अधिक हैंडसेट का निर्माण किया गया।”
एसोचैम ने सुझाव देते हुए कहा कि ई-वेस्ट के संग्रहण लक्ष्य का चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वयन करना चाहिए।
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