नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अनुसूचित जातियों पर अत्याचार की घटनाओं के मामले में सख्ती से निपटने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना चहिए कि अपराधी को कानून के हवाले किया जाए और पीड़ित को उचित मुआवजा मिले।
गहलोत शुक्रवार को राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के सामाजिक न्याय विभाग के प्रधान सचिवों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
गहलोत ने कहा कि सरकार ने पीओए अधिनियम में संशोधन किया है। इस संशोधन से कठोर सजा की व्यवस्था हुई है और पीड़ितों को दी जाने वाली राहत राशि भी बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि हाल में हमने पीओए नियमों में संशोधन को अधिसूचित किया है। उन्होंने राज्यों से इस अधिनियम को पूरी तरह लागू करने का आग्रह किया ताकि अनुसूचित जाति के लोगों पर होने वाले अत्याचार रोके जा सकें।
सिर पर मैला ढोने की प्रथा पर चिंता व्यक्त करते हुए थावरचंद गहलोत ने कहा कि युद्धस्तर पर इसका उन्मूलन करना होगा। उन्होंने राज्यों से इस अमानवीय प्रथा को प्राथमिकता के आधार पर समाप्त करने की दिशा में काम करने का आग्रह किया।
सामाजिक न्याय मंत्री ने कहा कि सरकार अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों तथा वरिष्ठ नागरिकों की शैक्षिक, आर्थिक तथा समाजिक अधिकारिता के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। उन्होंने योजनाओं को कारगर ढंग से लागू करने के लिए केंद्र और राज्यों को एक साथ मिलकर काम करने को कहा।
अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों के युवाओं की शिक्षा और उनके सशक्तिकरण पर बल देते हुए गहलोत ने कहा कि अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़े वर्गों के युवाओं को छात्रवृत्ति उनके मंत्रालय का अग्रणी कार्यक्रम है।
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना की चर्चा करते हुए गहलोत ने कहा कि इसे उन गांवों के एकीकृत विकास के लिए लागू किया जा रहा है जिन गांवों में 50 प्रतिशत से अधिक आबादी अनुसूचित जाति के लोगों की है।
थावरचंद गहलोत ने गैर अधिसूचित, खानाबदोश और अर्धघुमंतू जनजाति आयोग (डीएनटी) द्वारा तैयार रिपोर्ट भी जारी की। इस अवसर पर डीएनटी के अध्यक्ष बीकू रामजी इदाते भी उपस्थित थे।
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