सेंसर बोर्ड की अवधारणा हास्यास्पद : मिहिर जोशी

नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। पिछले साल अपने गाने ‘सॉरी’ को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाण बोर्ड (सीबीएफसी) के साथ पचड़े में पड़ चुके मुंबई के संगीतकार एवं टेलीविजन एंकर मिहिर जोशी का कहना है कि भारत में सेंसर बोर्ड की धारणा ‘हास्यास्पद’ है।

सीबीएफसी या सेंसर बोर्ड ने 2015 में उनके गाने ‘सॉरी’ के बोल से ‘बांबे’ शब्द को बीप कर दिया था।

इन दिनों अभिषेक चौबे निर्देशित ‘उड़ता पंजाब’ की ‘बेजा’ कट को लेकर सेंसर बोर्ड से चल रही कानूनी लड़ाई पर मिहिर ने आईएएनएस से कहा, “मैंने यह तब भी कहा था और अब भी कहूंगा। आधुनिक माने जाने वाले भारत जैसे देश में सेंसर बोर्ड की धारणा हास्यास्पद है। हमारे पास प्रमाण-पत्र बोर्ड जरूर हो सकता है।”

उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कह रहा हूं कि सबको सब कुछ देखना चाहिए। अगर बच्चों के लिहाज से विषय सामग्री संवेदनशील है, तो उन्हें मत देखने दीजिए, लेकिन कुछ लोगों के एक समूह का यह तय करना कि देखने के लिए क्या सही और गलत है, यह ख्याल या धारणा हास्यास्पद है।”

मिहिर ने कहा कि फिल्मकारों व संगीतकारों की एक जिम्मेदारी बनती है, लेकिन सेंसरशिप के नाम पर कलाकारों की रचनात्मक स्वतंत्रता नहीं छीननी चाहिए।

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