नई दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी(माकपा) ने सोमवार को रक्षा, विमानन और औषधि उद्योगों में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की मंजूरी देने की निंदा की। माकपा ने कहा कि यह देश के हित में नहीं है।
अमेरिका और भारत के बीच प्रगाढ़ होते सामरिक संबंधों का उल्लेख करते हुए माकपा ने कहा कि एफडीआई के बारे में निर्णय इन रक्षा समझौतों का एक परिणाम है।
माकपा ने बयान जारी कर कहा, “यह (एफडीआई के बारे में फैसला) भारत के हित में नहीं है और हमारी आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।”
बयान में कहा गया है, “भारत-अमेरिका सामरिक साझेदारी के परिणामस्वरूप मोदी सरकार ने अब हर क्षेत्र में अधिक एफडीआई की घोषणा की है।”
माकपा ने कहा, “भारत विदेशी पूंजी को अत्यधिक लाभ कमाने और उन्हें हमारी घरेलू अर्थव्यवस्था की कीमत पर अपने वैश्विक आर्थिक संकट से उबरने की छूट दे रहा है।”
माकपा ने यह भी कहा है कि भारत अब अमेरिका और जापान के साथ दक्षिण चीन सागर में नौसैनिक अभ्यास के लिए पक्ष बन गया है। पहले मालाबार नौसैनिक अभ्यास के नाम से इस तरह के अभ्यास अरब सागर में हुए थे, जो दक्षिण चीन सागर के जल की ओर बढ़ रहा है। इसके भारत की सुरक्षा और स्वतंत्र विदेशी नीति के मद्देनजर कई गंभीर निहितार्थ हैं।
माकपा ने अपनी मांग को दोहराते हुए कहा कि दक्षिण चीन सागर में विवादों का निपटारा अंतर्राष्ट्रीय कानून और स्थापित अंतर्राष्ट्रीय प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
वाम दल का मानना है कि भारत सरकार को अपनी पुरानी परखी हुई नीति पर कायम रहना चाहिए।
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