लखनऊ , 21 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले नेअन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर मंगलवार को कहा कि कोई भी योग साधक स्वार्थी नहीं हो सकता। योग एक जीवनशैली है। इसको हमें अपनाना चाहिए।
वह मंगलवार को खाटू श्याम मंदिर में स्वास्थ्य, समाज और सरोकार विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
दत्तात्रेय होसबोले ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “योग हजारों वर्षो से हमारे आचरण में है। यह संपूर्ण मानवता के लिए भारत की महत्वपूर्ण देन है। इसमें कोई भेदभाव नहीं है। यह सभी के लिए है।”
भगवान कृष्ण ने गीता में कहा ‘योग: कर्मषु कौशलम्’। किसी भी कार्य को कुशलता पूर्वक करना ही योग है। वहीं व्यक्ति से लेकर सृष्टि के संतुलन को बनाए रखने के लिए भी योग जरूरी है।
संघ के सह सरकार्यवाह ने कहा कि प्रचार करने के लिए योग नहीं है, बल्कि योग एक विधा है। योग: भवतु जीवनम् अर्थात योगमय जीवन बनाएं। योग केवल शारीरिक क्रिया मात्र नहीं है यह प्रथम सोपान है। विचार में भी संतुलन चाहिए। सत्यं शिवम सुंदरम के साथ जो भी कार्य हम कर रहे हैं उसमें सर्वहित है कि नहीं।
उन्होंने कहा, “योग के माध्यम से शरीर के मूल्यों का संवर्धन और इंद्रियों पर नियंत्रण करना चाहिए। इसके बाद मनुष्य को अपने जीवन को ठीक रखने के लिए दूसरे के जीवन को उत्तम बनाने के लिए प्रयत्न करना चाहिए। जैसे नदियां, पेड़ और गाय दूसरों के लिए हैं उसी तरह व्यक्ति को अपना जीवन बनाने का प्रयत्न करना चाहिए।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के कुलपति प्रो. रविकांत ने कहा कि हिंदुत्व धर्म नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है। उन्होंने कहा कि दंडवत प्रणाम के पीछे भी विज्ञान है।
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