श्रीनगर, 24 जून (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने जम्मू के एक मंदिर में तोड़फोड़ करने वाले एक युवक के खिलाफ लगाया गया लोक सुरक्षा कानून (पीएसए) हटा लिया है, क्योंकि युवक मानसिक रूप से बीमार है।
गृह विभाग ने गुरुवार की शाम बताया कि एक मंदिर को अपवित्र करने वाले युवक यासिर के खिलाफ जम्मू जिला प्रशासन द्वारा गत 20 जून को जारी आदेश उचित नहीं है, इसलिए उसका अनुमोदन नहीं किया गया है।
जम्मू एवं कश्मीर में पीएसए के तहत सभी गिरफ्तारियोंका गृह विभाग से अनुमोदन कराना पड़ता है। पीएसए को कड़े कानून के रूप में देख जाता है और आमतौर पर यह राष्ट्र विरोधी तत्वों, तस्करों और कट्टर अपराधियों के खिलाफ लगाया जाता है।
पीएसए कानून के तहत गिरफ्तार लोगों को बिना किसी न्यायिक हस्तक्षेप के एहतियातन अधिक से अधिक दो साल तक जेल में रखा जा सकता है।
डोडा जिले के रहेने वाले यासिर ने गत 14 जून को जम्मू शहर के रूपनगर इलाके में स्थित एक प्राचीन हिन्दू मंदिर में कथित रूप से तोड़फोड़ करने की कोशिश की थी।
उक्त घटना के बाद इलाके में हिंसा भड़क गई थी। प्रदर्शनकारियों ने चार वाहनों में आग लगा दी थी और स्थानीय पुलिस थाने पर पत्थरबाजी की थी।
घटना के दूसरे दिन राज्य सरकार ने विधानसभा में कहा था कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी युवक से पुलिस ने पूछताछ की थी। पूछताछ के दौरान युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ लगा।
विधानसभा में विपक्षी विधायकों ने गत गुरुवार को पीएसए के इस्तेमाल की निंदा की थी और आश्चर्य व्यक्त किया था कि एक मानसिक रूप से अस्वस्थ को पीएसए के तहत कैसे गिरफ्तार किया जा सकता है, जबकि उसने जो किया है उसका निहितार्थ वह नहीं जानता है और यह भी कि यह कानून राष्ट्र विरोधी तत्वों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है।
राज्य सरकार ने अब कहा कि युवक के खिलाफ यह पहली प्राथमिकी दर्ज हुई है। उसकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है। इसलिए कथित रूप से जो उसने किया है, उसके लिए पुलिस द्वारा उसके खिलाफ कानून की सामान्य धारा लगाना पर्याप्त होना चाहिए।
dharmpath.com dharmpath