भोपाल, 28 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में हर रोज 376 बच्चे काल के गाल में समा जाते हैं। यह खुलासा बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था यूनिसेफ द्वारा मंगलवार को जारी ‘दुनिया मंे बच्चों की स्थिति 2016’ नामक रपट से हुआ है।
राजधानी भोपाल में राज्य के स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री दीपक जोशी की मौजूदगी में इस रपट को जारी करते हुए यूनिसेफ की राज्य इकाई के प्रभारी प्रमुख मनीष माथुर ने कहा कि राज्य में पांच वर्ष की आयु तक के बच्चों में से 379 बच्चे हर रोज मौत का शिकार बन रहे हैं, वहीं देश में हर रोज मरने वाले बच्चों की संख्या 3,287 है।
माथुर ने वार्षिक रपट के आधार पर कहा कि राज्य में 10-14 प्रतिशत बच्चे प्राथमिक (पांचवीं तक) स्तर पर और 11-70 प्रतिशत बच्चे उच्च प्राथमिक (पांचवीं के बाद) स्कूल से बाहर हो जाते है, यानी पढ़ाई छोड़ देते हैं।
यूनिसेफ की यह रपट राज्य की प्राथमिक शिक्षा की स्थिति पर भी सवाल खड़े करती है। रपट कहती है कि राज्य में दूसरी कक्षा के 60.3 प्रतिशत बच्चे ही ऐसे हैं, जो अक्षर पहचानते हैं, वहीं तीसरी कक्षा के 32.2 प्रतिशत बच्चे शब्द पढ़ पाते हैं।
यूनिसेफ ने इस बार अपनी रपट डिजिटल रूप में जारी की है। इसका मकसद कागज के लिए पेड़ों की कटाई रोकनी है। इस मौके पर बाल संरक्षण अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र शर्मा, राज्य की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच मौजूद थीं। कार्यक्रम का संचालन यूनिसेफ के संचार प्रमुख अनिल गुलाटी ने किया।
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