दलित रैगिंग पीड़िता को नौकरी, वित्तीय मदद देगा केरल

कोझिकोड, 2 जुलाई (आईएएनएस)। केरल सरकार कर्नाटक के नर्सिग कॉलेज में रैगिंग की शिकार हुई दलित छात्रा के.पी. अश्वाथी को नौकरी देने के साथ-साथ वित्तीय तथा अन्य प्रकार की मदद भी देगी। एक मंत्री ने शनिवार को यह जानकारी दी।

गुलबर्ग स्थित अल कामर कॉलेज ऑफ नर्सिग की छात्रा के साथ उसके सीनियरों ने रैंगिग की थी, जिसके बाद वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गई।

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ए.के. बालन ने यहां संवाददाताओं को बताया, “हमने दलित छात्रा को दो लाख रुपये दिए हैं। हम उसके इलाज का खर्च उठाएंगे और यह भी सुनिश्चित करेंगे कि यहां के नर्सिग कॉलेज में उसकी पढ़ाई पूरी हो जाए।”

बालन ने कहा कि वह पहले अपनी पढ़ाई पूरी कर ले, उसके बाद उसे नौकरी भी उपलब्ध कराई जाएगी।

मंत्री ने अस्पताल में भर्ती अश्वाथी की तबीयत का भी जायजा लिया।

कर्नाटक पुलिस ने रैगिंग मामले में अब तक तीन लड़कियों लक्ष्मी, अथीरा और कृष्णप्रिया को गिरफ्तार किया है।

उल्लेखनीय है कि इन तीनों ने दलित छात्रा को नौ मई को होस्टल के कमरे में बाथरूम साफ करने में प्रयुक्त होने वाला कीटनाशक पीने के लिए मजबूर किया। इस कारण उसके आंतरिक अंगों में गंभीर जख्म हो गया।

इस मामले में कर्नाटक पुलिस एक अन्य आरोपी शिल्पा जोसे को तलाश रही है, जो फरार है। हालांकि, जोसे की अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई केरल उच्च न्यायालय द्वारा आठ जुलाई को की जाएगी।

इस बीच, इस मामले में गिरफ्तार हुई छात्राओं के परिजनों ने मीडिया को बताया कि उनकी बच्ची बेगुनाह हैं।

उन्होंने कहा कि अश्वाथी ने स्वयं ही कीटनाशक पदार्थ पीकर आत्महत्या की कोशिश की।

नर्सिग कॉलेज के प्रशासन ने भी कहा कि अश्वाथी की बीमारी का कारण रैगिंग नहीं है और इस मामले में आरोपी लड़कियों ने ही उसे कर्नाटक के अस्पताल में भर्ती करवाया और उसका ध्यान रखा।

अश्वाथी को यहां दो जून को अस्पताल में भर्ती किया गया था।

इस मामले में कोझिकोड में 22 जून को एक प्राथमिकी (एफआईआर) भी दर्ज की गई। इसके बाद जिला पुलिस ने कार्रवाई के लिए कर्नाटक पुलिस की मदद की मांगी।

कर्नाटक पुलिस अधिकारियों की नौ सदस्यीय टीम ने पीड़िता का बयान ले लिया है और गुलबर्ग की अदालत के समक्ष रिपोर्ट पेश कर दी है।

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