पहले नोटिस में उन्हें आईपीएस और पीपीएस अफसरों के तबादलों में हो रही अनियमितताओं के बारे में मुख्यमंत्री को सीधे ईमेल करने का गुनहगार बताया गया है, जबकि दूसरे नोटिस में कहा गया है कि उन्होंने एक टीवी कार्यक्रम में कहा कि शासन की व्यवस्था इस तरह चलती है कि व्यक्ति-व्यक्ति के साथ नियम-कानून बदल जाते हैं।
नोटिस के अनुसार, अमिताभ ने गोरखपुर के एसएसपी के निलंबन की आलोचना की और मथुरा के एसएसपी के तबादले को अनुचित बताते हुए कहा कि “राजनैतिक लोग अपने हितों के लिए हम लोगों से खेलते हैं।”
नोटिस में इसे अखिल भारतीय सेवाएं आचरण नियमावली के नियम 3 (सरकारी काम के प्रति पूर्ण समर्पण और सत्यनिष्ठा) तथा नियम 7 (सरकार की आलोचना) का उल्लंघन बताते हुए अमिताभ को 15 दिन में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
निलंबन में भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए वह मुख्यमंत्री आवास के सामने धरना पर बैठे थे। इस संबंध में भी उनके खिलाफ कार्यवाही चल रही है।
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