माया ने यहां मंगलवार को कहा कि चुनाव से पहले इस तरह की नाटकबाजी पहले कांग्रेस की सरकारें भी करती रहती थीं, उसी के पदचिह्नें पर ही अब केंद्र की भाजपा सरकार भी चल रही है।
मायावती ने एक बयान में कहा कि मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री का अखबारों के माध्यम से किया गया यह दावा लोगों को काफी बरगलाने वाला है कि बजट जिन बातों पर केंद्रित था, मंत्रिमंडल विस्तार उन बातों पर बल देने के लिए किया जा रहा है।
उन्हांेने कहा कि वास्तव में केंद्रीय मंत्रिमडल में किया गया विस्तार देश के विभिन्न राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव, खासकर उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में जल्द ही होने वाले चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है।
मायावती ने मोदी सरकार पर इस कैबिनेट विस्तार को नए शिगूफे के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अपने दो वर्षो से अधिक के कार्यकाल में पूंजीपतियों व धन्नासेठों का हित और गरीबों, किसानों, मजदूरों, दलितों, पिछड़ों व मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों तथा अन्य कमजोर तबकों की पूरी तरह से उपेक्षा की है।
मायावती ने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार बनने के दो साल बाद कमजोर तबकों को मंत्रिमंडल में छोटी-मोटी जगह देने से देश में व्यापक आबादी रखने वाले इन तबकों के लोगों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति सुधरने वाली नहीं है, बल्कि इसके लिए इन वर्गो के हित व कल्याण के लिए पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ जरूरी ठोस व बुनियादी कार्य लगातार ही करने होंगे, जिसकी तरफ मोदी सरकार का ध्यान अभी तक भी नहीं है।
माया ने कहा कि पूंजीपतियों का विकास और कमजोर वर्ग की उपेक्षा की मंशा के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दावा पूरी तरह से गलत व जन-विरोधी लगता है कि “यूपी के अगले चुनाव में जाति-धर्म नहीं, बल्कि विकास हमारा एजेंडा होगा”।
मायावती ने यह भी कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार का यह दायित्व बनता है कि वह देश की आमजनता को जवाब दे कि वह ‘सत्यमेव जयते’ के स्थान पर कोई और जयते क्यों हो गई है, जैसा कि उस पर आरोप लग रहे हैं।
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