डूटा ने जावेड़कर को लिखा पत्र, बताईं समस्याएं

नई दिल्ली, 8 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने शुक्रवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय नवनियुक्त मंत्री प्रकाश जावेड़कर को पत्र लिखकर विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी की ओर ध्यान दिलाया।

डूटा की अध्यक्ष नंदिता नारायण का कहना है कि डीयू में पिछले सालों में छात्रों की संख्या बढ़ती ही जा रही है, जबकि हजारों शिक्षकों के पद खाली हैं।

उन्होंने कहा, “साल 2007 में अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षण शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय में अतिरिक्त पदों के स़ृजन का वादा किया गया था। लेकिन अभी भी इन पदों पर भर्तियां नहीं हुई हैं, अस्थायी और अतिथि अध्यापकों से कम चलाया जा रहा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि छात्र और शिक्षकों के बीच का अनुपात अधिक होने से शिक्षा के स्तर और विश्वविद्यालय की अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग पर भी असर पड़ रहा है।

नंदिता का कहना है, “यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने पदों के दूसरी किश्त को जारी नहीं किया है, जिस कारण क्लास रूम में भीड़ काफी बढ़ गई है। छात्र-शिक्षक अनुपात अधिक होने के कारण न सिर्फ शिक्षण के स्तर पर असर हो रहा है, बल्कि विश्वविद्यालय की वैश्विक रैंकिंग भी गिर रही है।”

उन्होंने आगे बताया, “वर्ष 2008 से ही देशभर में लाखों शिक्षकों को पदोन्नति नहीं दी जा रही है, जिस कारण शोध की गुणवत्ता और विश्वविद्यालयों में पठन-पाठन में कमी आ रही है।”

विश्वविद्यालय और कॉलेज शिक्षकों के वेतन को बढ़ाने की सिफारिश करते हुए उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं में समय-समय पर पदोन्नति होती है।

उन्होंने हजारों तदर्थ शिक्षकों की दुर्दशा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे विश्वविद्यालयों में ‘अपमानजनक’ स्थितियों में काम कर रहे हैं।

नंदिता ने जावेड़कर से मिलने का समय मांगते हुए लिखा, “उच्च योग्य शिक्षक अत्यंत अपमानजनक, अनिश्चित और शोषित परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। उन्हें हर चार महीने पर नवीनीकरण की जरूरत होती है। उन्हें छुट्टियों, वेतन, मातृत्व अवकाश, स्वास्थ्य अवकाश के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्हें वेतन वृद्धि से वंचित किया जाता है।”

डूटा ने नए यूजीसी नियमों के विरोध में प्रवेश तथा मूल्यांकन प्रक्रिया का बहिष्कार कर रहा है।

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